नैनीताल। सरोवर नगरी में कुत्ते आतंक का पर्याय बने गए हैं। बीते आठ साल में कुत्तों ने 8163 लोगों को नोंचा है। औसतन हर दिन तीन लोगों को कुत्ते काट रहे हैं। नगर पालिका के कई प्रयासों के बावजूद कुत्तों के आतंक से लोगों को छुटकारा नहीं मिल पा रहा है।
नगर में कुत्तों का आतंक दस साल या उससे भी ज्यादा पुराना है। कभी कोई बच्चा इनका शिकार बनता है तो कभी युवा तो कभी बुजुर्ग को काट कर कुत्ते लहूलुहान कर देते हैं। कुत्ते एक पर्यटक बच्ची की मौत का कारण भी बन चुके हैं। बीते वर्ष डीएम ने कुत्तों का बधियाकरण कराने के निर्देश दिए थे। पालिका ने बधियाकरण किया भी, लेकिन कुत्तों की संख्या बढ़ती गई।
उधर, जनवरी में कुत्तों ने 93 लोगों को काटा, जबकि फरवरी में यह आंकड़ा 101 और मार्च में 97 का है। कुत्ते हर दिन किसी न किसी को काट रहे हैं। नगर पालिका और प्रशासन के पास शिकायतों का अंबार है, लेकिन कार्रवाई नहीं हो पा रही है। आवारा कुत्तों के साथ ही पालतू कुत्ते भी लोगों को काट रहे हैं। पालिका की ओर से पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन एवं टीकाकरण कराने की भी व्यवस्था की गई, लेकिन रजिस्ट्रेशन कराने में कोई भी रुचि नहीं ले रहा। नगर में पालतू कुत्तों की संख्या 500 से ज्यादा है और रजिस्ट्रेशन 50 कुत्तों के भी नहीं कराए गए हैं।
आठ साल में 8163 लोगों को कुत्तों ने नोंचा
नैनीताल में आतंक का पर्याय बने कुत्ते
पालिका ने नगर के 70 प्रतिशत कुत्तों का बधियाकरण किया है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि इससे ज्यादा पशुओं का बधियाकरण न किया जाए। जो बच्चे पैदा हो रहे हैं वह शेष 30 प्रतिशत कुत्तों के होंगे। कुत्ते लोगों को न काटें, इसके लिए पालिका लगातार प्रयास कर रही है। -रोहिताश शर्मा, ईओ नगर पालिका।
आंकड़ों पर नजर
साल कुत्तों के शिकार
2011 834
2012 961
2013 929
2014 862
2015 1101
2016 774
2017 1222