नैनीताल। पीसीसीएफ जयराज ने कहा कि राज्य में जंगल की आग रोकने के लिए करीब 7.63 करोड़ रुपये का बजट किया गया है। आग रोकने के लिए प्रभाग स्तर तक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिला स्तर पर डीएम की ओर से फायर एक्शन प्लान को स्वीकृत किया जा चुका है।
एटीआई में मंगलवार को प्रेसवार्ता में पीसीसीएफ ने कहा कि जंगल की आग रोकने के लिए स्थानीय जनसमुदाय का सहयोग जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं क्योंकि स्थानीय लोगों की मदद के बिना यह कार्य संभव नहीं है। वन पंचायतों को भी इसके लिए प्रेरित किया जा रहा है। उनके लिए करीब पांच करोड़ रुपये का बजट अलग से जारी किया जाएगा। इसके लिए जागरूकता रथ भी चलाया जा रहा है। यह रथ कुमाऊं के विभिन्न क्षेत्रों में घूमकर जनता को जागरूक करेगा। बाघ, तेंदुओं के अंगों को छिपा कर रखने के मामले में उन्होंने कहा कि इसकी जांच के लिए सरकार ने एसआईटी गठित कर दी है, जो मामले की जांच करेगी। मामला कोर्ट में है। इसलिए कोर्ट के आदेश का अनुपालन किया जाएगा।
जंगल की आग रोकने के लिए 7.63 करोड़ जारी
एटीआई में प्रेसवार्ता के दौरान पीसीसीएफ जयराज ने दी जानकारी
मांगे गए प्रारूप के अनुुसार ही दें आरटीआई में सूचना
नैनीताल। उत्तराखंड प्रशासन अकादमी (एटीआई) में गुड गवर्नेंस पर मंगलवार को भी कार्यशाला जारी रही। कार्यशाला में सेवानिवृत्त सूचना आयुक्त एसएस रावत ने सुशासन में सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) की भूमिका बताई। उन्होंने आईएफएस अधिकारियों को आरटीआई एक्ट की विभिन्न धाराओं और नियमों के विषय में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जनता की ओर से जिस प्रारूप में जानकारी मांगी जाती है, उसी प्रारूप के अनुसार जानकारी दी जाए। कहा कि यह व्यवस्थाओं को बनाने में काफी मददगार सिद्ध होगा। सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी आईके पांडे ने सुशासन और सतत विकास विषय पर व्याख्यान दिया। पीसीसीएफ जयराज ने विभिन्न स्थानों से आए आईएफएस अधिकारियों के साथ वन सेवा संबंधी अनुभव बांटे। डॉ. ओमप्रकाश ने संचालन किया। इस मौके पर कोर्स निर्देशक डॉ. मनोज पांडे, डॉ. बीएन मोहंती, ललित कुमार तिवारी, विजय कुमार, भगत सिंह, जी रमन, अनूप सिंह, वीएस मलिक, सुनील कुमार, एएम शर्मा आदि थे।