रानीखेत (अल्मोड़ा)। पहाड़ की स्वास्थ्य सेवाओं की तरफ न तो सरकार का ध्यान है और न ही जनप्रतिनिधियों का। चुनाव में इन समस्याओं को लेकर जनता के बीच जाने वाले जनप्रतिनिधि समस्याओं को भूल जाते हैं। यहां गोविंद सिंह माहरा राजकीय अस्पताल में करोड़ों की लागत से निर्मित ट्रामा सेंटर का भवन सफेद हाथी साबित हो रहा है।
करोड़ों खर्च कर दिए लेकिन पर्याप्त सुविधाएं आज तक नहीं जुट पाई हैं। गंभीर दुर्घटनाओं के रोगी आज भी सुशीला तिवारी अस्पताल पर ही निर्भर हैं।
उपमंडल क्षेत्र की सर्पीली सड़कों में वाहन दुर्घटनाओं की आशंका के मद्देनजर रानीखेत उपमंडल के अलावा गैरसैंण, चमोली और बागेश्वर क्षेत्र के लोगों की मांग पर भाजपा की अंतरिम सरकार ने स्थानीय राजकीय अस्पताल में एक करोड़ की लागत से ट्रामा सेंटर स्वीकृत किया।
2009 में भवन बना और तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने अल्मोड़ा में इसका लोकार्पण तक कर डाला। तब से लेकर डॉक्टरों की व्यवस्था नहीं हो सकी। फिलहाल इस भवन में डॉक्टर रह रहे हैं। लोगों का कहना है कि राजनीतिक दलों के नुमाइंदों ने लोगों को हमेशा गुमराह किया है।
व्यापार संघ जिलाध्यक्ष मोहन नेगी ने कहा कि महकमा प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था के लिए कतई गंभीर नहीं है। इसका खामियाजा रोगियों को भुगतना पड़ रहा है। व्यापार मंडल नगर अध्यक्ष भगवंत नेगी का कहना है कि रानीखेत राजकीय अस्पताल में बने ट्रामा सेंटर का रोगियों को कोई लाभ नहीं मिला। राजकीय अस्पताल के अधीक्षक डॉ. डीएस नेई ने कहा कि केंद्र में जब तक डॉक्टरों की व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक इसके संचालन की कोई उम्मीद नहीं दिख रही।