रानीखेत (अल्मोड़ा)। रानीझील को नैनीताल स्थित ताल की तर्ज पर विकसित करने की मांग आज तक पूरी नहीं हो सकी है। इधर नई सरकार की तरफ से कुछ दिन पूर्व कई नई झीलों के निर्माण और उनके सौंदर्यीकरण की घोषणा भी की गई है, लेकिन रानीझील के उच्चीकरण, सौंदर्यीकरण के लिए पूर्व में सिंचाई विभाग द्वारा भेजे गए 2.5 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। पर्यटन की दृष्टि से रानीझील के सौंदर्यीकरण बेहद जरूरी है। हालांकि छावनी परिषद ने बीते दिनों इसे संवारने का प्रयास भी किया है।
रानीखेत प्रख्यात पर्यटन नगरी है, लेकिन यहां पर्यटकों के मनोरंजन के लिए खास संसाधन नहीं हैं। गोल्फ मैदान, चौबटिया का सेब गार्डन के अलावा अभी तक नए पर्यटक स्थल विकसित नहीं हो सके हैं। पर्यटकों के मनोरंजन के लिए 2006 में यहां छावनी परिषद द्वारा नरसिंह मैदान के ठीक नीचे रानीझील का निर्माण किया गया, लेकिन शुरुआती दौर में यह झील पर्यटकों को लुभाने में नाकाम रही। लोग समय-समय पर इसके सौंदर्यीकरण की मांग उठाते रहे।
इसके बाद छावनी परिषद ने झील में कुछ नौकाएं भी डाली। इसका प्रचार-प्रसार हुआ, लेकिन सौंदर्यीकरण को लेकर आज तक ठोस पहल नहीं हो सकी। बीते कुछ वर्षों में छावनी परिषद ने रानीझील के विकास का निर्णय लिया। यहां नौकाओं की संख्या बढ़ाई गई। बच्चों को आकर्षित करने के लिए उनके मनोरंजन के संसाधन भी विकसित किए गए। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह झील नैनीताल के ताल के रूप में विकसित हो सकती है। इसका सौंदर्यीकरण और उच्चीकरण किया जाना चाहिए। मालूम हो कि दो साल पूर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत को स्थानीय लोगों द्वारा ज्ञापन सौंपा गया था, इसके बाद मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग को झील के सौंदर्यीकरण के लिए निर्देशित किया था।