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गैरसैंण स्थायी राजधानी के लिए 11 जुलाई से होगा राज्य व्यापी आंदोलन

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द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। गैरसैंण को प्रदेश की स्थायी राजधानी बनाने के लिए गैरसैंण राजधानी संघर्ष समिति ने फिर से कमर कस ली है। समिति की यहां हुई बैठक में राज्य आंदोलन की तर्ज पर संघर्ष करने का निर्णय हुआ, तय हुआ कि राज्य समर्थक ताकतों को एकजुट किया जाएगा। बैठक में सरकारों पर राजधानी के मसले पर राजनीति के माध्यम से लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया गया। वक्ताओं ने कहा कि गत दिनों स्थायी राजधानी के लिए चले लंबे संघर्ष के बावजूद सरकार ने आंदोलनकारियों की सुध तक नहीं ली है। 11 जुलाई को द्वाराहाट में जुलूस प्रदर्शन के साथ निर्णायक आंदोलन की शुरुआत होगी।
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संघर्ष समिति के अध्यक्ष चारू तिवारी ने राजधानी को लेकर पिछले 18 वर्षों से चल रहे संघर्ष की जानकारी दी, कहा कि तब से आई सरकारों ने इस मुद्दे पर सिर्फ प्रदेश की जनता को छलने का काम किया है। चार माह तक चले धरना प्रदर्शन, विस घेराव कार्यक्रम में किसी भी सरकार के नुमाइंदे ने आंदोलनकारियों का हाल तक नहीं पूछा। कहा कि 14 जनवरी 1992 में उक्रांद ने गैरसैंण राजधानी को लेकर ब्लू प्रिंट तैयार कर सभी प्रवासी संगठनों, क्षेत्रीय ताकतों को साथ लिया था, उसी तरह से अब फिर से राज्य समर्थक ताकतों को एकजुट किया जाएगा। उक्रांद के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष पुष्पेश त्रिपाठी ने भी भाजपा और कांग्रेस पर राजधानी के मुद्दे पर सिर्फ राजनीति करने का आरोप लगाया। 11 जुलाई को द्वाराहाट में जुलूस प्रदर्शन के साथ आंदोलन शुरू होगा। बैठक में नारायण सिंह बिष्ट, कमला पवार, जगदीश बुधानी, गजेंद्र नेगी, परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी, एकता परिषद की मधुबाला कांडपाल, मोहन कांडपाल, बचे सिंह, चंदन सिंह, जसवंत बिष्ट, विनोद जोशी, दर्शन सिंह, गिरीश भट्ट, पूरन पांडे, आनंद नाथ, भीम सिंह, गोपाल सिंह, प्रकाश जोशी सहित तमाम लोग मौजूद थे।

राज्य समर्थक ताकतों को एकजुट करने की तैयारी में जुटी समिति
सरकारों पर लगाया जनता को छलने का आरोप

आंदोलन के लिए विनोद जोशी बने संयोजक
द्वाराहाट। स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने को लेकर प्रस्तावित आंदोलन के लिए पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष विनोद जोशी को संयोजक बनाया गया है। वह 14 सदस्यीय समिति का गठन करेंगे। इसके बाद प्रदेश भर में ब्लॉक स्तर पर धरना प्रदर्शन होंगे और गैरसैंण राजधानी की अलख जलाई जाएगी।
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