व्यवस्थाएं बनाने और बदलने वालों का भी गजब हाल है। नए शिक्षा सत्र से प्राइमरी और जूनियर हाइस्कूलों में पाठ्य सामग्री बदलाव से लेकर कई नई व्यवस्थाएं लागू कर तो दी मगर उनका क्रियान्वयन अब तक नहीं हो पाया है। सत्र शुरू हुए 12 दिन बीत गए हैं लेकिन पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है। बच्चे बिना किताब स्कूल आ रहे हैं। इस बार से किताबें सरकार नहीं देगी बल्कि किताबें बाजार से खरीदने के लिए उनके खातों में पैसा आएगा। पहले बच्चों के खाते खुलेंगे, फिर पैसा आएगा और तब स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो पाएगी। नवीन सक्सेना सक्सेना की रिपोर्ट।
कक्षा एक से आठ तक सभी पुस्तकें हिंदी माध्यम की एनसीईआरटी पुस्तकें होंगी। कक्षा तीन से आठ तक की कक्षाओं में संस्कृत विषय की पुस्तक एनसीईआरटी की नहीं एससीईआरटी उत्तराखंड की चलेगी। कक्षा तीन और छह में विज्ञान विषय अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाने के आदेश हैं। शिक्षकों पर अंग्रेजी में पढ़ाने का दबाव भी है।
दस वर्ष से कम उम्र के बच्चे का खाता माता पिता के साथ संयुक्त खुलेगा। जीरो बैलेंस से खाता खोलने और खुलने के बाद भी बैलेंस जीरो रहने के कारण अधिकतर बैंक पहले तो बच्चों के खाते खोलने से कतरा रहे हैं। यदि खोल भी रहे हैं तो किसी एक स्कूल के सभी खाते खोलने को तैयार नहीं हैं। शिक्षक बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं। बैंक फार्म भी नहीं दे रहे हैं। आधार कार्ड में बच्चे या माता पिता का स्थानीय पता न होने या कोई त्रुटि होने पर बैंक खाते नहीं खोल रहे।
जिन बच्चों के खाते खुल चुके हैं उनके खातों में शिक्षा विभाग अभी तक किताबें खरीदने के लिए पैसा डाल नहीं पाया है। दो-चार बच्चे खुद किताबें खरीद भी लाएं हैं। अधिकतर बच्चों के पास किताबें न होने के कारण पढ़ाई नहीं हो पा रही।
महकमे का आदेश है कि स्कूल के साथ-साथ पंजीकृत बच्चों की पूरी जानकारी पोर्टल पर अपलोड कराएं। अब अध्यापक इस आदेश का पालन करें या फिर पढ़ाएं।
स्कूली शिक्षा में एक साथ कई बदलाव होने से कुछ दिक्कतें जरूर आ रहीं हैं। जल्द पठन-पाठन पटरी पर आ जाएगा। पुस्तकें लेने के लिए बच्चों के खाते में पैसा ट्रांसफर करने को जिलों को पहली किश्त के रूप में करीब आठ करोड़ जारी किए गए हैं।
राकेश कुमार कुंवर, निदेशक विद्यालयी शिक्षा उत्तराखंड
12 दिन बाद भी प्राइमरी स्कूलों में शुरू नहीं हो सकी पढ़ाई
11 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं राज्य के 15 हजार 200 स्कूलों में