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विश्वविद्यालयों की रैंकिंग

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हल्द्वानी। उच्च शिक्षा को लेकर प्रदेश सरकार भी गाहे बगाहे चिंता जताती रही है, अब मानव विकास संसाधन मंत्रालय की ओर से जारी उच्च शिक्षण संस्थाओं की रैंकिंग ने प्रदेश सरकार की चिंता में इजाफा ही किया है। देश के चुनिंदा कॉलेजों में प्रदेश का एक भी महाविद्यालय शामिल नहीं हो पाया है। इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर में आईआईटी रुड़की, प्रबंधन में आईआईएम काशीपुर और विश्वविद्यालयों में पंतनगर ने जरूर प्रदेश की लाज बचाई है।
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मानव विकास संसाधन मंत्रालय की रैंकिंग से प्रदेश सरकार की चिंता में इसलिए भी इजाफा होगा क्योंकि प्रदेश का एक भी फार्मेसी और मेडिकल कॉलेज इसमें रैंक हासिल नहीं कर पाया है। 2003 के औद्योगिक पैकेज के बाद प्रदेश में फार्मा सेक्टर बड़ी तेजी के साथ उभरा। पिछले कुछ समय से प्रदेश सरकार उद्योग और शिक्षण संस्थाओं के हमकदम होने की बात भी करती रही है। इसी तरह स्वास्थ्य सेवा में सुधार केभी प्रदेश सरकार लगातार दावे कर रही है। सरकारी के अलावा निजी क्षेत्र में भी उत्तराखंड में कई मेडिकल कालेज हैं, लेकिन एक भी कालेज को इस रैंकिंग में जगह नहीं मिल पाई। कुमाऊं मंडल के ऊधमसिंह नगर जिले में औद्योगिक पैकेज के लागू होने के बाद कई उद्योग स्थापित हुए हैं। प्रबंधन में रुड़की आईआईटी ने 62.95 अंक लेकर 9वां और काशीपुर आईआईएम ने 51.20 अंक लेकर 20 स्थान हासिल किया है। विश्वविद्यालयों में संसाधनों की कमी के बावजूद पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय ने 46.56 लेकर 34वीं रैंक हासिल की है। 25वें स्थान पर रहने वाले तमिलनाडु कृषि विवि को 49.22 अंक हासिल हुए हैं। साफ है कि इस वर्ग में खासी प्रतिस्पर्धा रही।
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देश के चुनिंदा सौ महाविद्यालयों में प्रदेश से का एक भी नहीं
प्रबंधन में काशीपुर, रुड़की, विश्वविद्यालयों में पंतनगर ने बचाई लाज
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