हल्द्वानी। फैक्ट्री, कंपनियों, स्कूलों के बाद अब नदियों में धर्मकांटा संचालन वगैरह सेवाएं देने वाले ठेकेदार भी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफ) की जांच के दायरे में आ गए हैं। क्षेत्रीय कार्यालय खनन क्षेत्र में लगे कार्मिकों के पीएफ जमा होने की जांच शुरू कर रहा है।
उत्तराखंड वन विकास निगम गौला, कोसी, दाबका, नंधौर, कैलास नदियों में खनन कराता है। इनमें धर्मकांटा संचालन का जिम्मा ठेकेदारों को दिया जाता है। एक धर्मकांटे पर औसतन तीन-चार कर्मचारी काम करते हैं। गौला में 13, नंधौर, कैलास में पांच, कोसी, दाबका में भी पांच गेट हैं। आमतौर पर हर गेट पर दो-तीन कांटे होते हैं। इस तरह हर नदी में 40 से 110 तक कर्मचारी काम करते हैं। ईपीएफ अधिकारियों के मुताबिक दिहाड़ी मजदूर, मासिक वेतन पर काम करने वाले कर्मियों का भी पीएफ जमा होना चाहिए। इसलिए विभाग अब नदियों में सेवाएं देने वाले ठेकेदारों के कर्मियों के पीएफ जमा होने की जांच कर रहा है। वैसे तो नदी का सीजन सिर्फ आठ माह का होता है। इसलिए विभाग यह भी देख रहा है कि आठ माह तक पीएफ जमा किया गया है या नहीं। यदि ठेकेदारों ने पीएफ जमा नहीं किया होगा तो सभी ठेकेदारों को नोटिस जारी कर कर्मियों का पीएफ जमा कराया जाएगा। ऐसा न कराने पर उनके बैंक खातों को सीज किया जाएगा।
कर्मियों को पीएफ मिलने की जांच होगी
पीएफ जमा न होने पर कार्रवाई होगी
नदियों के खनन में इलेक्ट्रिक धर्मकांटा संचालन आदि सेवाएं देने वाले ठेकेदार के कर्मियों की पीएफ जमा होने की जांच होगी। यदि पीएफ जमा नहीं किया होगा तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- कार्तिकेय सिंह, क्षेत्रीय आयुक्त, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, हल्द्वानी।