हल्द्वानी। मंडी और कमलुवागांजा स्टेट पूल गोदाम में खराब चावल भेजने वालों से खर्च की वसूली की जाएगी। चावल छंटाई में आया खर्च अब अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ मिलों से वसूलने की तैयारी है। संभागीय खाद्य नियंत्रक कुमाऊं ललित मोहन रयाल ने छंटाई कमेटी से पूरे खर्च का ब्योरा मांगा है।
कमलुवागांजा और मंडी गोदाम में मिलों की ओर से खराब चावल भेजा गया था। ऐसा अधिकारियों और मिलों की मिलीभगत से हुआ था। मंडी गोदाम का चावल पूरा बदला जा चुका है जबकि कमलुवागांजा गोदाम का चावल बदला जा रहा है। छंटाई में हुआ खर्च कौन देगा और वसूली किससे होगी इस पर सवाल उठ रहे थे। कर्मचारी और अधिकारी आरएफसी में दबाव बनाए हुए हैं कि सभी खर्च मिल वालों वसूला जाए लेकिन आरएफसी इसके लिए कतई तैयार नहीं हैं। सूत्रों की मानें तो परिवहन का खर्च चावल मिलों से वसूला जाएगा। उठान और भरान का खर्च कर्मचारियों से वसूला जाएगा। वीडियोग्राफी का खर्च भी आधा-आधा वसूला जाएगा।
राज्य भंडार निगम के कर्मचारियों से भी होगी वसूली
राज्य भंडार निगम के मंडी और कमलुवागांजा गोदाम में तैनात अधिकारी-कर्मचारियों से भी खर्च वसूलने की तैयारी है। नियमों की बात करें तो चावल लगाने के दौरान राज्य भंडार निगम के कर्मचारियों को भी चावल की जांच करनी होती है। मानकों के अनुरूप चावल पाए जाने पर इसे गोदाम में लगाना होता है लेकिन विभाग के कर्मचारियों की अनदेखी और मिलीभगत के कारण खराब चावल गोदाम में उतर गया।
कमलुवागांजा गोदाम के चावल मिलों पर मेहरबानी क्यों
कमलुवागांजा गोदाम में पड़ा खराब चावल छह माह बीतने के बाद भी अभी नहीं बदला जा सका है। चावल मिलें धीरे-धीरे खराब चावल बदल रहे हैं। इस कारण कुमाऊं के पहाड़ी जिलों में चावल के लाले पड़ गए हैं। दो माह से कई जिलों में चावल ही नहीं बंट पाया है। उधर छंटाई टीम की ओर से इन चावल मिलों को अभी तक ब्लैक लिस्ट नहीं किया गया है। इससे छंटाई टीम भी सवालों के घेरे में हैं।