क्रिकेटरों की फिजिकल फिटनेस के लिए उत्तराखंड की वादियां मुफीद
भीमताल (नैनीताल)।
उत्तराखंड के पहाड़ों में पर्यटन की असीम संभावनाएं तो हैं ही साथ ही यहां का वातावरण नौजवानों को क्रिकेट की बारीकियां सिखाने के लिए बेहद मुफीद है। प्रकृति के करीब रहकर और प्रदूषण मुक्त वातावरण में खिलाड़ी खुद को न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बना सकते हैं बल्कि बेहद आसानी से खेल की बारीकियां भी सीख सकते हैं। उत्तराखंड में क्रिकेट प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। यदि बीसीसीआई उत्तराखंड क्रिकेट बोर्ड को मान्यता दे दे तो यहां की प्रतिभाएं भी क्रिकेट के क्षेत्र में दुनिया भर में उत्तराखंड का नाम रोशन कर सकती हैं।
यह कहना है कि भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज रहे वीरेंद्र सहवाग वीरू के कोच शशि काला का। शशि काला इन दिनों यहां सातताल में चल रही यंग मैन क्रिश्चियन एसोसिएशन (वाईएमसीए) की ओर से आयोजित 18वीं अखिल भारतीय जेके टायर क्रिकेट प्रतियोगिता में दिल्ली डेयरडेविल्स के अधीन संचालित बाल भवन क्रिकेट एकेडमी दिल्ली की अंडर 18 टीम को लेकर पहुंचे हैं। शनिवार को अमर उजाला से विशेष बातचीत में शशि काला ने कहा कि कुमाऊं में क्रिकेट की असीम संभावनाएं हैं।
यहां के प्राकृतिक वातावरण में खिलाड़ियों के फिटनेस लेवल को बढ़ाकर उनमें बेहतर स्टेमिना विकसित किया जा सकता है। सातताल की प्राकृतिक सुंदरता से अभिभूत शशि काला ने कहा कि जल्द ही वह अपनी टीम के फिजिकल फिटनेस को बेहतर करने के लिए यहां शिविर लगाकर खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देंगे।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड क्रिकेट बोर्ड को बीसीसीआई की मान्यता न मिलने के कारण उत्तराखंड के कई खिलाड़ी दूसरे प्रांतों की टीम से खेलकर उन राज्यों का नाम रोशन कर रहे हैं। पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी, मनीष पांडे, पवन पांडे व ऋषभ पंत समेत कई क्रिकेटर हैं जो हैं तो उत्तराखंड के लेकिन खेलते दूसरे प्रांतों की टीमों से हैं। मौजूदा भारतीय क्रिकेट टीम के बारे में शशि काला का कहना है कि वर्तमान में टीम इंडिया नंबर वन पर है और इसमें कोचिंग मैनुअल में हुए बदलाव के साथ-साथ पूर्व कोच ग्रेग चैपल का महत्वपूर्ण योगदान है। वार्ता के दौरान अखिल भारतीय जेके टायर क्रिकेट प्रतियोगिता के मुख्य आयोजक आफताब मसीह भी मौजूद थे।