हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) के संचालित पोस्ट डिप्लोमा कोर्स (पीजी डिप्लोमा) शुरू करने को हरी झंडी मिल गई है। इसके अलावा अन्य कोर्स शुरू करने की भी सशर्त अनुमति जल्द मिलने की संभावना है।
कुलसचिव प्रो. आरसी मिश्रा ने मंगलवार को दिल्ली में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के चेयरमैन और सचिव से मुलाकात की। कुलसचिव ने चेयरमैन के समक्ष यूओयू के बंद किए गए 75 पाठ्यक्रमों को फिर से शुरू कराने के लिए प्रत्यावेदन प्रस्तुत किया। बताते हैं कि कुलसचिव ने चेयरमैन को अवगत कराया कि यूजीसी के इस फैसले से प्रदेश के छात्रों को उच्चशिक्षा पाना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि संस्थागत पढ़ाई करने से वंचित छात्रों के लिए यूओयू के अलावा दूसरा कोई अन्य आसान माध्यम नहीं हैं। प्रत्यावेदन में फैकल्टी और संसाधनों से जुड़े नियमों को जल्द पूरा करने की बात कही। यूजीसी ने अब यूओयू के पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स संचालित करने को हरी झंडी दे दी है। इससे यूओयू के 17 से अधिक पीजी डिप्लोमा कोर्स शुरू हो जाएंगे। बताया जाता है कि अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम चलाने की सशर्त सहमति देने को भी यूजीसी तैयार है। इस मामले में यूजीसी 16 अगस्त को एक पत्र यूओयू को भेजेगा, उसके जवाब में यूओयू को सभी मानकों को एक निश्चित समय सीमा में पूरा करने संबंधी अंडर टेकिंग देनी होगी। इसके बाद ही अब बचे 58 कोर्स शुरू करने की आधिकारिक अनुमति मिलेगी। ज्ञात हो कि यूजीसी ने 75 कोर्स की मान्यता नहीं दी थी।
इग्नू के कुलपति डॉ. राव बने मददगार
हल्द्वानी। यूओयू का पक्ष मजबूती से रखने और अनुमति मिलने के संबंध में पूर्व कुलपति एवं वर्तमान में इग्नू के कुलपति प्रो. नागेश्वर राव की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कुलसचिव प्रो. मिश्र ने यूजीसी के अधिकारियों से सकारात्मक वार्ता होने की पुष्टि की है।
यूजीसी ने एक वर्ष पूर्व ही किया था आगाह
हल्द्वानी। यूजीसी ने एक साल पहले ही उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय को गाइड लाइन जारी कर मानकों को पूरा करने के संबंध में आगाह किया था। उत्तराखंड मुक्त विवि के सूत्रों के मुताबिक यूजीसी ने पिछले वर्ष 23 जून 2017 को देश के सभी मुक्त विश्वविद्यालयों को निर्देश जारी किए थे कि नये सत्र में पाठ्यक्रम संचालन से पूर्व फैकल्टी एवं संसाधनों को दुरुस्त कर लिया जाए। यूजीसी ने इसकी समय सीमा एक जुलाई 2018 तक निर्धारित थी। बताते हैं कि किस मुक्त विश्वविद्यालय ने एक वर्ष में कितने मानकों को पूरा किया, इसकी समीक्षा करने के लिए बीते माह छह जुलाई को मुक्त विवि के कुलपति और अन्य अधिकारियों को दिल्ली में बुलाया गया था। यूजीसी ने बैठक में मुक्त विश्वविद्यालयों से पाठ्यक्रमों की रूपरेखा जानीं तथा इसमें कोई सुधार नहीं पाया। यूजीसी के निर्देशों को पूरा न करने के कारण ही कोर्स बंद करने की नौबत आई है।
इन निर्देशों का करना था पालन
- कोई भी प्राइवेट अध्ययन केंद्र नहीं चलेगा, अगर कोई संचालित हो रहा है तो उसे बंद किया जाना था।
- अध्ययन केंद्र केवल राजकीय डिग्री कालेज या फिर विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्थानों में ही बनाए जा सकते हैं। परास्नातक पाठ्यक्रम पीजी महाविद्यालय में ही चलेगा न कि डिग्री कालेज में चलाया जाएगा।
- किसी भी पीजी विषय के विभाग में एक प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर, एक असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति होना अनिवार्य था।
कुलसचिव ने यूजीसी चेयरमैन के सामने रखा पक्ष, बाकी कोर्स शुरू करने की भी मिल सकती सशर्त अनुमति