हल्द्वानी। काठगोदाम स्थित ब्यूराखाम के ग्रामीण इस उम्मीद के साथ अधिकारियों की बाट जोह रहे हैं कि शायद कोई अधिकारी उनकी जानमाल की सुरक्षा के इंतजाम करा दे, लेकिन इस गांव में कोई भी जिम्मेदार अधिकारी ग्रामीणों की सुध लेने नहीं पहुंचा। इससे क्षेत्र के ग्रामीण गुस्से में हैं।
पिछले साल 13 जुलाई की रात 3:30 बजे ब्यूराखाम मलबे से पट गया था। कई लोगों के घरों को क्षति हुई थी। तब तत्कालीन डीएम दीपेंद्र चौधरी ने पहाड़ी में सुरक्षा दीवार बनवाने, भूस्खलन प्रभावित पहाड़ी में बांस का पौधरोपण कराने, क्षतिपूर्ति देने का आश्वासन दिया था, लेकिन मौके पर एक अदद छोटी दीवार बनाने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं हुई। बुधवार को अमर उजाला टीम मौके पर पहुंची तो ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा बताई। ग्रामीणों का कहना था कि आपदा के बाद से वह अधिकारियों का इंतजार कर रहे हैं ताकि वह अपनी पीड़ा उन तक पहुंचा सकें। शायद उनकी समस्याओं का कोई समाधान निकल जाए लेकिन कोई भी अधिकारी उनकी समस्या जानने नहीं पहुंचा। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि ब्यूराखाम में आपदा प्रबंधन के ठोस उपाय शीघ्र नहीं किए गए तो क्षेत्र के लोग आंदोलन को मजबूर होंगे।