रानीखेत (अल्मोड़ा)। देवदार के घने जंगल के बीच स्थापित स्वर्गाश्रम बिनसर महादेव मंदिर की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है। यह मंदिर श्रद्धालुओं की अपार श्रद्धा का केंद्र रहा है। बताते हैं कि कुजगड़ नदी के किनारे पड़े शिवलिंग की स्थापना करने के बाद एक निसंतान दंपति को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी। पंच दशनाम जूना अखाड़ा के नागा बाबा मोहन गिरि महाराज ने यहां पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था, मंदिर के स्थापना दिवस पर 18 जून से यहां 11 दिनी यज्ञोत्सव, शतचंडी यज्ञ और भागवत कथा का आयोजन होगा।
बिनसर महादेव मंदिर समुद्रतल से 2480 मीटर की ऊंचाई और देवदार के घने पेड़ों के बीच बसे बिनसर महादेव मंदिर की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है। मंदिर के बारे में बताते हैं कि निकटवती सौनी गांव में एक 65 वर्षीय निस्थान दंपति रहते थे। एक दिन वृद्ध के सपने में एक साधु बाबा आए और कहा कि जंगल में कुंज नदी के किनारे शिवलिंग पड़ा है, उस स्थान पर शिवलिंग की स्थापना कर वहां मंदिर का निर्माण करो। निसंतान दंपति ने वहां छोटा सा मंदिर बनाया और लिंग की विधिवत स्थापना की। उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। इसी छोटे से मंदिर को बिनसर महादेव मंदिर के रूप में जाना जाता है। 1959 में पंच दशनाम जूना अखाड़ा से जुड़े नागा बाबा मोहनगिरि महाराज ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। अब यहां शंकर शरण गिरि संस्कृत विद्यापीठ भी है। इसकी देखरेख की जिम्मेदारी वर्तमान में महंत रामगिरि महाराजपर है। ब्रह्मलीन बाबा की स्मृति में मंदिर में हर साल 11 दिवसीय यज्ञोत्सव समारोह होता है। जिसमें दिल्ली, रामनगर सहित दूर दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मंदिर के स्थापना दिवस पर शतचंडी यज्ञ और यज्ञोत्सव आज से
ब्रह्मलीन नागा बाबा मोहन गिरि महाराज ने किया था मंदिर का जीर्णोद्धार
शतचंडी यज्ञ और भागवत कथा के कार्यक्रम:-
-18 जून की सुबह यज्ञ, पंचाग पूजन, जल याप्रा, मंडप प्रवेश, पुराण पूजन
-19 जून की सुबह वेदियों का पूजन, प्रधान देव पूजन और ग्रहजाग
-20 जून से 27 जून तक प्रतिदिन पूजा पाठ और हवन होगा।
-28 जून को पूर्णाहूति तथा समष्टि भंडारे के साथ कार्यक्रम संपन्न होगा।