निजी और पब्लिक स्कूलों के लिए खुशी की खबर है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में गरीब एवं कमजोर वर्ग के पढ़ रहे बच्चों की फीस का भुगतान करने के लिए शासन ने साढ़े पांच करोड़ की धनराशि स्वीकृत कर दी है। विभाग ने शासन से स्वीकृति आते ही निजी एवं पब्लिक स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों का सत्यापन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सभी उपशिक्षा अधिकारियों से वास्तविक डिमांड भी पूछी है।
जिले भर के निजी एवं पब्लिक स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत करीब आठ हजार बच्चे पढ़ रहे हैं। गरीब एवं कमजोर वर्ग के बच्चों का नि:शुल्क दाखिला कराने के उपरांत इनकी फीस क्षतिपूर्ति का भुगतान सर्वशिक्षा अभियान से स्कूलों को किए जाने का प्रावधान है। करीब चार वर्षों से आरटीई के तहत अध्ययनरत बच्चों की फीस का भुगतान शिक्षा विभाग नहीं कर सका है। इससे निजी एवं पब्लिक स्कूलों को आर्थिक परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है।
एक-एक स्कूल में आरटीई के बच्चों की संख्या 100 से दो सौ तक पहुंच चुकी है। इधर, निजी स्कूल इस बार आरटीई के तहत नि:शुल्क प्रवेश नहीं करने का मन बना रहे थे। शिक्षा विभाग ने इस स्थिति से शासन का अवगत कराया था जिस पर शासन ने प्रथम चरण में निजी स्कूलों के भुगतान को साढ़े पांच करोड़ का बजट मंजूर करने का पत्र जारी कर दिया है।