फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पेंसिल से याराना, डॉ. अग्रवाल का यही अफसाना

विज्ञापन
विज्ञापन
हल्द्वानी। डॉ. सतीश चंद्र अग्रवाल को लोग समाजसेवी और पूर्व आयकर आयुक्त के नाम से जानते हैं मगर उनके भीतर छिपे कलाकार के भाव से शायद ही कोई परिचित है। उनकी पेंसिल से दोस्ती है। आज से नहीं बचपन से। किसी का भी रेखाचित्र बनाना हो वह पलभर में हूबहू तस्वीर उतार देते हैं। सालों से अलमारी में कैद रही डॉ. अग्रवाल की बचपन की यह कलाकारी कैनवास पर एक बार फिर उभरकर सामने आई है। अपने हुनर को कैनवास पर उतारते समय पहले तो उनके हाथ कांपे लेकिन जब चित्र उकेरना शुरू किया तो परिणाम देख खुद भी चकित हो गए।
विज्ञापन

डॉ. अग्रवाल 2013 में आयकर आयुक्त पद से सेवानिवृत्त डॉ. अग्रवाल को बचपन से ही संगमरमर में मूर्ति निर्माण और पेंसिल से रेखाचित्र बनाने का शौक रहा है। बचपन में खूब चित्रकारी की और उसे सहेज कर रख लिया। लेकिन पढ़ाई, नौकरी की तैयारी, परिवार और बच्चों की पढ़ाई में उनका यह शौक पूरी तरह बंद हो गया। एक बार फिर उनका शौक जागा है। वह फिर चित्रकारी करने लगे हैं। रिटायमेंट के बाद रवींद्र नाथ टैगोर, महात्मा गांधी, पं. गोविंद बल्लभ पंत, इंदिरा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, आइंस्टीन, शिवाजी, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, महाराणा प्रताप के अलावा कई राजनेताओं और महापुरुषों के करीब 40 रेखाचित्र बना चुके हैं। उन्होंने मॉरीशस के हिंदी साहित्य पर शोध किया है। वह कई काव्य गोष्ठियों, सम्मेलनों में प्रतिभाग कर चुके हैं। मॉरीशस हिंदी साहित्य संस्थान द्वारा उन्हें राहुल सांकृत्यायन सम्मान से नवाजा जा चुका है। डॉ. अग्रवाल की बड़ी बेटी आर्द्रा 2007 बैच की गुजरात कैडर की आईएएस हैं जबकि छोटी बेटी आकांक्षा कंप्यूटर कंपनी आईबीएम में नोएडा में कार्यरत हैं। बेटा अक्षत भारतीय राजस्व सेवा में कस्टम एंड सेंट्रल एक्साइज में दिल्ली में कार्यरत हैं। लटूरिया बाबा आश्रम स्थित हनुमान गुफा के निर्माण में भी उनका अहम योगदान रहा है।
विज्ञापन


65 साल के बुजुर्ग हूबहू बना देते हैं महापुरुषों और राजनेताओं के रेखाचित्र
पांच साल पहले आयकर आयुक्त पद से सेवानिवृत्त हुए हैं
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें