हल्द्वानी। नगर निगम के अधिकारी ही अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई करने के बदले उसका ही पक्ष ले रहे हैं। वे ही अपनी जमीन में अतिक्रमण करा रहे हैं। एडीएम और व्यापारी नगर निगम के शौचालय में जाने को महावीर गंज से दो रास्ते होने की बात कह रहे हैं। वहीं नगर निगम के एक अधिकारी वहां रास्ता नहीं होने की बात कह रहा है। इससे नगर निगम की कार्यप्रणाली में सवाल उठने लाजिमी है।
व्यापारियों की मांग पर विधायक इंदिरा हृदयेश ने मीरा मार्ग में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया था। उस समय नगर आयुक्त हरबीर सिंह थे। जिलाधिकारी के आदेश के बाद तत्कालीन नगर आयुक्त हरवीर सिंह ने शौचालय का डिजायन डीएम को पेश किया था। उस समय महावीर गंज से मीरा मार्ग के शौचालय और पार्किंग में जाने के लिए दो रास्ते थे। ये बात मीरा मार्ग के व्यापारी भी कह रहे हैं। बाद में एक व्यापारी ने इस दुकान में टीन शेड डालकर उस दुकान में अतिक्रमण करा दिया। साथ ही निगम के अधिकारी से मिलकर इस फड़ का तहबाजारी शुल्क भी कटाने लगा।
उधर तत्कालीन नगर आयुक्त और वर्तमान में नैनीताल जिले के एडीएम हरबीर सिंह ने बताया कि मीरा मार्ग की पार्किंग और शौचालय में जाने को महावीर गंज से दो रास्ते थे। प्रभारी सहायक नगर आयुक्त विजेंद्र चौहान से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने यहां पर दो रास्ते होने की बात को साफ नकार दिया। इससे साफ है या तो तत्कालीन नगर आयुक्त और व्यापारी झूठ बोल रहे हैं। या फिर निगम के अधिकारियों के शह पर ये दुकान बनाई गई है।
मीरा मार्ग के फड़ों से कौन वसूल रहा है किराया
हल्द्वानी। मीरा मार्ग में खुलेआम सड़क के किनारे फड़ और ठेलों को लगवा कर मोटी वसूली की जा रही है। हद ये है कि ई-टॉयलेट को भी ढक दिया गया है। उधर फड़ वालों ने मीरा मार्ग के एक व्यापारी को प्रतिमाह आठ से दस हजार रुपया देने की बात कही है। ई-टॉयलेट से अतिक्रमण हटाने के लिए व्यापारी कई बार निगम के अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
नगर निगम और स्थानीय प्रशासन ने दो माह पूर्व मीरा मार्ग से अतिक्रमण हटाया था। इस दौरान ई-टॉयलेट के पास बनाए गए फड़ को भी हटा दिया गया था। दो-तीन दिन फड़ नहीं लगने के बाद अब मीरा मार्ग में दोबारा कब्जे होने लग गए हैं। हद ये है कि दोबारा ई-टॉयलेट के रास्ते तक को ढक दिया गया है। मीरा मार्ग के व्यापारियों का कहना है कि इन फड़ों में सात-आठ फड़ एक व्यापारी के हैं। उन्होंने कहा कि इन फड़ों से इस व्यापारी की ओर से वसूली की जाती है। निगम के एक अधिकारी भी इसमें शामिल है। उधर फड़ और ठेले वालों ने ठेला लगाने के एवज में महीने के आठ से 10 हजार रुपये के बात कही है।
ऐसे होता है खेल
कुछ दबंग किस्म के व्यक्ति नगर निगम के अधिकारियों के साथ मिलकर बाजार में ठेले लगवाते हैं। इसके एवज में पैसा वसूलते हैं और निगम के अधिकारियों को भी देते हैं। इसके एवज में निगम का वह अधिकारी फड़ और ठेलों को तहबाजारी का शुल्क देता है।