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एफसीआई से चावल खरीदने की तैयारी

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हल्द्वानी।
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कुमाऊं में तीन और गढ़वाल में एक महीने का चावल नहीं बंट पाया है। मिलों की ओर से सरकार पर पूर्व की तरह नीति लागू करने का दबाव बनाया जा रहा है। पुष्ट सूत्रों की मानें तो सरकार अब भारतीय खाद्य निगम से चावल खरीदने जा रही है। इसके पीछे चावल लाबी के दबाव को तोड़ना है।
चावल मिलों की ओर से सरकार और विभाग पर दबाव बनाया जा रहा है कि वह पूर्व की भांति धान खरीद करने दे। उधर, सरकार ने इस बार उत्तराखंड के किसानों से धान लेने और उसके एवज में किसानों के खाते में आरटीजीएस या चेक के माध्यम से भुगतान करना अनिवार्य कर दिया है। साथ ही संभागीय खाद्य नियंत्रक कुमाऊं ने एक आदेश जारी किया है। इस आदेश में कहा गया है कि चावल मिलें कच्चा आढ़त के रूप में पंजीकृत नहीं हो सकती हैं। मिलों की ओर से अगर कच्चा आढ़त के नाम पर धान खरीद की गई तो उनका भुगतान रोक दिया जाएगा।
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अब चावल मिल मालिक इस आदेश के खिलाफ दबाव बनाए हुए है। रविवार को यह बात चावल मिलों की ओर से रुद्रपुर में हुई बैठक में प्रमुखता से उठी। साथ ही अभी तक कुछ कच्चा आढ़तियों को छोड़कर किसी ने खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग में कच्चा आढ़ती में पंजीकरण नहीं कराया है। पुष्ट सूत्रों की मानें तो सरकार ने इसका तोड़ ढूंढ लिया है। शासन की ओर से भारतीय खाद्य निगम से राज्य के लिए चावल की मांग की गई है। जल्द ही सरकार निगम से चावल खरीद हो सकती है। हर माह गढ़वाल में 13599.69 मीट्रिक टन और कुमाऊं में 9914.67 मीट्रिक टन चावल की जरूरत होती है। अभी विभाग के पास चावल न के बराबर है। विभाग पर राशन कार्ड धारकों को चावल देने का दबाव है। इसी का फायदा चावल मिलें उठाना चाह रही है।
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