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कटखने बंदर हर माह 10-15 लोगों को काट रहे

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रानीखेत (अल्मोड़ा)। बंदरों, सुअरों और लंगूरों के आतंक के चलते जनमानस परेशान है, लेकिन इन्हें रोकने के लिए अभी तक स्पष्ट नीति नहीं बन सकी है। वन्यजीवों ने जहां पर्वतीय कृषि व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। वहीं कटखने बंदरों के कारण राजकीय अस्पताल में हर महीने 10-15 मरीज इलाके के लिए पहुंचते हैं। बंदरों के आतंक के चलते कई स्थानों पर सब्जी उत्पादन का कार्य सिमट चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार को कृषि मेले अथवा अन्य आयोजनों के बजाए जानवरों के आतंक से निजात दिलानी चाहिए। इधर, नगर क्षेत्र में इन दिनों लंगूरों का आतंक भी बढ़ने लगा है।
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गगास घाटी, सिलोर, ककलासौं, कंडारखुवा और धूराफाट पट्टी से जुड़े गांवों में जंगली सुअरों और बंदरों ने फसल को नष्ट कर दिया है। मकड़ों, बिल्लेख सहित तमाम सब्जी उत्पादन के मशहूर इलाकों में आतंक के चलते सब्जी का उत्पादन सिमट चुका है। रानीखेत नगर, मालरोड, कुंपूर लालकुर्ती में भी बंदरों का आतंक है। इन क्षेत्रों में बंदरों के साथ ही लंगूर भी सक्रिय होने से समस्या और बढ़ गई है।

कुंपुर लालकुर्ती, चमड़खान आदि क्षेत्रों में लंगूर अधिक सक्रिय है। बच्चों का अकेले स्कूल जाना दूभर हो जा रहा है। काश्तकार राजेंद्र बिष्ट का कहना है कि वन विभाग और शासन को जंगली जानवरों के आतंक से निजात दिलाने के प्रयास करने चाहिए। यही हाल रहे तो पारंपरिक कृषि व्यवस्था रसातल में चली जाएगी। पन्याली निवासी शिवराज सिंह माहरा का कहना है कि जब तक वन अधिनियम के मानकों में शिथिलता नहीं की जाती, यह समस्या जारी रहेगी।
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बंदरों के काटने के बाद इलाज कराने के लिए अस्पताल में हर माह 10 से 15 केस आते हैं। अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शनों की पूरी व्यवस्था है।
- डॉ. डीएस नेई, अधीक्षक, राजकीय अस्पताल रानीखेत।

तेंदुए के आतंक से ग्रामीणों में दहशत, सुरक्षा की मांग
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। तेंदुए के आतंक से परेशान कुमाल्ट के ग्रामीणों ने प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। कुमाल्ट, धन्यारी, बड़ेत, नौगांव, द्यौलाड़गूंठ सहित तमाम गांवों में पिछले तीन माह से तेंदुए ने आतंक मचा रखा है। तेंदुआ इन ग्राम पंचायतों में दर्जन भर से अधिक मवेशियों को निवाला बना चुका है। जबकि स्कूल जा रहे दो बच्चों पर झपटने का प्रयास भी कर चुका है। तेंदुए की दहशत के चलते महिलाएं अकेले में खेतों में जाने से भी डर रही हैं।
ग्रामीणों ने डीएम को ज्ञापन भेजकर सुरक्षा की गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव का पेयजल संग्रहण का मुख्य टैंक गांव के ठीक ऊपर है। इस स्थान पर तेंदुआ दो शावकों के साथ बैठा रहता है। यहां पानी खोलने जाने वाले लोगों के लिए भी खतरा बना हुआ है।

बताया कि इस समस्या को क्षेत्र पंचायत समिति की बैठकों में भी प्रमुखता से उठाया गया, लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं हुई है। तेंदुआ अब तक जगदीश राम पुत्र किशन राम, चंदू राम पुत्र रूप राम, युगल किशोर पुत्र मथुरादत्त, नित्यानंद पुत्र शिवदत्त, हरीश चंद्र पुत्र दिनेश चंद्र, महेश चंद्र पुत्र अंबादत्त, भुवन चंद्र पुत्र मदन नारायण, हरी राम पुत्र मनोरथ राम की दुधारू गाय और बकरियों को निवाला बना चुका है। ज्ञापन भेजने वालों में प्रधान ललित मोहन पांडेय, कैलाश पांडेय, हरशरण पांडे, चंद्रशेखर पांडे, शंकर राम, राकेश पांडे, मोहन राम, हरीश राम, प्रताप सिंह, निर्मल पांडेय, दीपक आदि शामिल हैं। ब्यूरो
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