हल्द्वानी। आज राजा राम बरसों का वनवास काट कर घर लौटे थे, उसी की याद में दीये जलाकर उत्सव मनाया जाएगा, लेकिन नैब में रह रही चार बेटियों का ‘वनवास’ इस साल भी खत्म नहीं होगा। घर, परिवार, रिश्तेदार होने के बाद भी ये बेटियां वर्षों से घर नहीं गई हैं और न ही उनके परिजन मिलने आए। यह बात दीगर है कि सब बच्चे-बच्चियों का कहना है कि वह नैब में ही रहकर दीपावली मनाना चाहते हैं।
नेशनल एसोसिएशन फॉर ब्लाइंड (नैब) के आवासीय परिसर में 84 बच्चे रहते-पढ़ते हैं। इसमें से चार छात्राएं ऐसी हैं जो तीन-चार वर्षों से परिजनों की बाट जोह रही हैं। अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर क्षेत्र की निवासी बीना भाकुनी आठ वर्षों से नैब में रह रही है। बीना बताती है कि चार साल पहले तक दादा मिलने आते थे। उनकी मृत्यु के बाद ने तो उससे कोई मिलने ही आता है और न ही उसके परिजनों का फोन ही आता है। वहीं, बाड़ेछीना निवासी निशा आर्या तीन वर्षों से घर नहीं गई हैं। तीसरी की छात्रा निशा ने बताया कि वह दीपावली नैब में ही मनाना चाहती है। यही उसका परिवार है। रामनगर की दो बहनें पूजा और भावना भी चार वर्षों से घर नहीं गई हैं। दोनों बहनें सात साल पहले नैब में आईं थीं। सभी बच्चों का कहना है कि वह नैब में ही रहकर दीपावली मनाना चाहते हैं। उनका कहना है कि यहां उन्हें स्नेह के साथ ही परिवार का माहौल मिलता है। बच्चों को कहना है कि वह हथगोले फोड़कर दीपावली मनाएंगे।
बच्चों में है गजब का उत्साह
दीपावली की रौनक को कुछ लोग देख तो नहीं सकते, लेकिन महसूस कर सकते हैं। उनके लिए यह त्योहार खुशियों, उमंगों को जीने का और स्नेह को पाने का बहाना होता है। ऐसे ही कुछ बच्चे हैं नैब गौलापार के आवासीय परिसर में रहने वाले दृष्टिबाधित दिव्यांग। ये दिव्यांग बच्चे दीपावली को लेकर खासे उत्साहित हैं। बच्चों ने दीपावली के लिए विशेष तौर पर सजावटी सामान आदि बनाया है। वार्डन मीना सिंह ने बताया कि बच्चों ने पुराने और अनुपयोगी सामान से सजावट के लिए पताका, कागजों की मालाएं आदि सामान बनाया है। मीना बताती हैं कि परिसर में रह रहे 85 में से 15 बच्चे ही अपने घर गए हुए हैं। वहीं, बच्चों से बात की तो उन्होंने कहा कि अब यही परिवार है। हम सब भाई-बहन हैं। यहां रह कर स्नेह से दीपावली पर्व मनाएंगे।