नैनीताल। उच्च न्यायालय ने अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोपों के मामले में रानीखेत छावनी परिषद को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। चिलियानौला हैड़ाखान मंदिर मार्ग ( रानीखेत) निवासी ललित मोहन ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि रानीखेत छावनी परिषद में अनियमितता और भ्रष्टाचार किया जा रहा है। छावनी परिषद में सात चयनित सदस्य हैं और छह पदेन सदस्य हैं। छावनी परिषद अधिनियम के तहत बोर्ड में आधे सदस्यों का उपस्थित रहना अनिवार्य है। याची का कहना है कि बिना कोरम के बोर्ड बैठक की जा रही है और चुने प्रतिनिधियों को इन बैठकों में शामिल नहीं किया जा रहा है। याचिका में बोर्ड की ओर से 10 मार्च 2017 को पारित एजेंडे पर रोक लगाने की मांग करते हुए इस प्रकरण की किसी निष्पक्ष संस्था से जांच कराने की मांग की थी।