बाढ़ सुरक्षा से इन्कार मगर रेता बजरी निकालने को दी मंजूरी
हल्द्वानी।
शासन को नदियों में दैवीय आपदा के नाम पर बाढ़ सुरक्षा से कोई सरोकार नहीं है, सिर्फ रिवर ट्रेनिंग के जरिए रेता, बजरी की निकासी और बिक्री पर ही ध्यान दिया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। गौला का पानी किनारे पर बसे गांवों, खेतों को नुकसान नहीं पहुंचा सके इसलिए सिंचाई महकमे ने महज सवा लाख रुपये का क्यूनेट बनाने का प्रस्ताव भेजा, जिसे शासन ने मंजूरी नहीं दी वो भी तब जब स्वयं एसडीएम ने दौरा करने के बाद आपदा राहत के लिए तैयार कराया था। जबकि इसी क्षेत्र में रिवर ट्रेनिंग की स्वीकृति हुई।
एसडीएम नैनीताल वंदना सिंह ने करीब तीन हफ्ते पूर्व अमृतपुर का निरीक्षण किया था। यहां डहरिया गांव में नदी का रूख खेतों की तरफ था जिससे नदी किनारे बसे इस गांव की सैकड़ों हेक्टेयर खेती बाढ़ के पानी में तबाह होने की आशंका थी। इस पर एसडीएम सिंह ने सिंचाई महकमे को तत्काल बाढ़ सुरक्षा प्रबंधन की योजना तैयार करने को कहा। एसडीएम के निर्देशानुसार सिंचाई विभाग ने दैवीय आपदा के अंतर्गत महज 1.25 लाख रुपये का प्रस्ताव बनाया। इस योजना में नदी में क्यूनेट बनाई जानी थी ताकि नदी के पानी को क्यूनेट के जरिए दूसरी ओर डायवर्ट किया जा सके।
हैरानीजनक कहे या शर्मनाक खुद प्रशासनिक अधिकारियों के निरीक्षण के बाद तैयार कराए गए इस प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान नहीं की गई। आश्चर्यजनक तो यह है कि इसी अमृतपुर में डहरिया से एक-डेढ़ किमी की दूरी पर बसे अमियां गांव में रिवर ट्रेनिंग के लिए मंजूरी दे दी। जो स्पष्ट करता है कि शासन को बाढ़ सुरक्षा नहीं सिर्फ रेता बजरी निकालने पर ही फोकस है। फिलहाल अमृतपुर में 15 जून तक रिवर ट्रेनिंग यानी रेता, बजरी निकालने का काम किया गया है। अब यह ट्रेनिंग बाढ़ नियंत्रण में मददगार होगी जल्द ही खुलासा हो जाएगा।
एसडीएम के निर्देशानुसार अमृतपुर में खेतों को नदी के पानी से बचाने के लिए सवा लाख रुपये का प्रस्ताव बनाया था, जिसे मंजूरी नहीं मिल सकी है।
- तारादत्त कांडपाल, ईई सिंचाई विभाग हल्द्वानी