हल्द्वानी। कुमाऊं भर से जहां मरीज इलाज की उम्मीद में पहुंचते हैं, वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के 60 फीसदी पद खाली होने से यहां आने वाले मरीजों को अन्यत्र जाना पड़ रहा है।
एसटीएच में हर रोज दो से ढाई हजार की ओपीडी होती है और इतने ही मरीज अस्पताल में भर्ती रहते हैं। पर यहां 18 विभागों में चिकित्सा विशेषज्ञों की कमी बनीं हुई है। गायनी, कम्यूनिटी मेडिसिन, फारेंसिक, साइकेट्रिक आदि विभागों में प्रोफेसरों की कमी के साथ ही सर्जरी, टीबी एंड चेस्ट विभाग, नेत्र रोग विभाग, मेडिसिन, कम्यूनिटी मेडिसिन, गायनी, पीडिया आदि में एसोसिएट, असिस्टेंट प्रोफेसर और सीनियर रेजिडेंट के पद खाली चल रहे हैं। कार्मिक विभाग के अनुसार मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के 14, सीनियर रेजिडेंट के 12, एसोसिएट प्रोफेसर के 45 और असिस्टेंट प्रोफेसर के 63 पद खाली हैं। इस कारण बेहतर इलाज के लिए कई बार मरीजों को यहां से रेफर करना पड़ता है।
हफ्ते भर बाद भी नहीं मिला मेडिकल कॉलेज को स्थायी प्राचार्य
राजकीय मेडिकल कॉलेज में 31 अगस्त को स्थायी प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी सेवानिवृत्त हो गए थे। इसके बाद यहां प्रभारी प्राचार्य को कार्यभार सौंपा गया। उनके पास अभी वित्तीय अधिकार भी नहीं हैं। चिकित्सा अधीक्षक का पद भी प्रभारी के भरोसे चल रहा है।
शासन को पत्र भेजा है। एनओसी मिलने के बाद जल्द इंटरव्यू शुरू कर दिए जाएंगे। नियमित प्राचार्य के लिए कार्रवाई चल रही है। हफ्ते भर के भीतर सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कॉलेज में नियमित प्राचार्य की नियुक्ति भी हो जाएगी।
डॉ. अजय आर्या, निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य, देहरादून