हल्द्वानी। जिला प्रशासन द्वारा लोकसभा निर्वाचन के लिए अधिग्रहण होने के कारण एमबीपीजी कॉलेज को अब एक और झटका लगा है। महाविद्यालय के मूल्यांकन के लिए आने वाली नैक कमेटी को इस माह न भेजने का कॉलेज प्रशासन ने राष्ट्रीय प्रत्यायन एवं मूल्यांकन कमेटी (नैक) को पत्र भेजा है। कॉलेज प्रशासन ने तर्क दिया है कि महाविद्यालय का अधिकांश भाग जिला निर्वाचन कार्यालय के रूप में जिला प्रशासन ने अधिग्रहण किया है। इसमें अधिकतर विभागों में स्ट्रांग रूम बनाकर ईवीएम, वीवीपैट रखी हैं, सुरक्षा के चलते महाविद्यालय के इस हिस्से में स्थित विभागों में प्रवेश वर्जित रखा गया है। महाविद्यालय में मूल्यांकन हो पाना अभी संभव नहीं है।
जिला निर्वाचन अधिकारी एवं डीएम विनोद कुमार सुमन ने लोकसभा चुनाव के लिए एमबीपीजी कॉलेज का 15 मार्च को अधिग्रहण किया था। महाविद्यालय में जिला निर्वाचन कार्यालय स्थापित है। मतदान के उपरांत स्ट्रांग रूम में ईवीएम, वीवीपैट कड़ी सुरक्षा में रखी हैं। 23 मई को मतगणना होने के बाद ही महाविद्यालय खाली हो सकेगा। कुमाऊं विवि की प्राइवेट एवं स्नातक, परास्नातक की सेमेस्टर परीक्षाएं 15 मई से शुरू हो रही हैं लेकिन एमबीपीजी कॉलेज में निर्वाचन कार्यालय होने के चलते परीक्षाएं नहीं हो पा रही हैं। इससे 20 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं प्रभावित हो रहे हैं। एमबी कॉलेज में परीक्षाएं तीन जून से होंगी। नैक के मूल्यांकन की तैयारी कई महीनों से जोरशोर से चल रही हैं। इसके अंतर्गत महाविद्यालय द्वारा ऑनलाइन एसएसआर सेल्फ स्टडी रिपोर्ट तैयार कर वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है। मूल्यांकन कराने को लेकर महाविद्यालय द्वारा सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद अब केवल नैक कमेटी के आने की सूचना आनी बाकी थी। इसको लेकर कॉलेज प्रशासन काफी परेशान था। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जीएस बिष्ट के निर्देशन में समिति संयोजक डॉ. बीआर पंत, सह संयोजक डॉ. गोविंद पाठक, डॉ. नवल किशोर लोहनी नैक मूल्यांकन कराने की तैयारी कर रहे हैं। कमेटी ने कहा है कि निर्वाचन कार्यालय के चलते इस माह नैक मूल्यांकन होना संभव नहीं है, इसके बाद ही नैक मूल्यांकन हो सकेगा।
जिला प्रशासन का एमबीपीजी कॉलेज में एक और अड़ंगा
कॉलेज अधिग्रहण के चलते नैक टीम का निरीक्षण टालना पड़ा
- महाविद्यालय में अध्ययनरत हैं 12 हजार छात्र-छात्राएं
- कुमाऊं में सबसे अधिक यहां पंजीकृत हैं 300 से अधिक शोध छात्र
- प्राध्यापकों द्वारा 200 से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित किए गए हैं। 200 से ज्यादा पुस्तकों का प्रकाशन भी किया गया है।