हल्द्वानी। प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट आयुष्मान भारत को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ही पलीता लगा रहे हैं। रानीखेत की एक वृद्ध मरीज आयुष्मान भारत का कार्ड होने के बाद भी हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में भर्ती नहीं हो सकी।
रानीखेत निवासी यश देवी (82) को शुक्रवार को पैरालिसिस हुआ था। हल्द्वानी निवासी नीरज गुप्ता ने बताया कि वह मौसी को शनिवार को हल्द्वानी लाए और मुखानी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। बताया कि दो निजी अस्पताल में गए तो एक में न्यूरो सर्जन नहीं थे, जबकि एक अस्पताल के न्यूरो सर्जन फेलोशिप करने के लिए दो माह के लिए बाहर गए हुए है।
उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत के तहत मौसी का कार्ड बना है। नैनीताल रोड स्थित एक अस्पताल में गए तो पता चला कि योजना को लेकर अभी कागजी कार्रवाई पूरी नहीं हुई है। हालांकि वेबसाइट पर अस्पताल को योजना के तहत सूचीबद्ध दिखाया जा रहा है। ऐसे में मरीज का इलाज मुखानी के एक निजी अस्पताल में ही चल रहा है। आयुष्मान योजना में पात्र होने के बाद भी मरीज को लाभ नहीं मिल पाया।
योजना के राज्य समन्वयक, डॉ. सरोज नैथानी ने कहा कि अस्पताल योजना के तहत सूचीबद्ध है। मरीज को रुद्रपुर के एक निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की बात हुई है। हल्द्वानी के दो निजी अस्पताल अभी योजना से नहीं जुड़ पाए हैं। सीएमओ को प्राथमिकता के आधार पर शेष रह गए निजी अस्पतालों को आयुष्मान योजना से जुड़वाना चाहिए।
- दो अस्पतालों में नहीं मिले न्यूरो सर्जन, तो एक अस्पताल के पैनल में पूरी नहीं हुई प्रक्रिया
आयुष्मान भारत की राज्य समन्वयक ने रुद्रपुर के निजी अस्पताल में की है मरीज की व्यवस्था