हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। बिना ऑक्सीजन सिलिंडर के 24 घंटे कट गए। यदि गोरखपुर जैसे हालात हो जाते तो अस्पताल के पास लोगों की जान बचाने के इंतजाम नहीं थे।
सुशीला तिवारी अस्पताल में रोजाना ऑक्सीजन के 120 सिलिंडरों की खपत होती है। तीन जुलाई को ऑक्सीजन सिलिंडर की आपूर्ति ठीक ढंग से नहीं हो रही थी। इसकी सूचना प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा और एमएस डॉ. अरुण जोशी को दी गई थी। चार जुलाई को हालत यह हो गई कि ऑक्सीजन समाप्त होने को थी और स्टॉक में एक भी सिलिंडर नहीं था। आपूर्ति करने वाली कंपनी ने भरोसा दिलाया था कि चार जुलाई को दो बजे से पहले ही 60 सिलिंडरों की आपूर्ति की जाएगी, मगर आपूर्ति नहीं की गई। आपूर्ति करने वाली कंपनी के वास्तविक स्थिति न बताने के कारण मरीजों की जान 24 घंटे तक जोखिम में रही। आपूर्ति कंपनी के सटीक सूचना न देने के कारण दूसरी कंपनी से ऑक्सीजन सिलिंडर की आपूर्ति नहीं कराई जा सकी।
सुशीला तिवारी अस्पताल में ऑक्सीजन का संकट-मेन
120 सिलिंडरों की होती है एक दिन में खपत
पत्र में जताई चिंता
अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई की देखरेख करने वाले विभाग की ओर से एमएस को लिखे पत्र में कहा गया कि इतने बड़े चिकित्सालय में एक ही कंपनी से ऑक्सीजन आपूर्ति कराना सुरक्षा की दृष्टि से अस्वीकार्य है। चिकित्सालय और रोगियों के हित में दूसरी कंपनी को भी साथ लेना आवश्यक है। पिछले छह महीने में यह दूसरी घटना है। पहले भी ऐसा हो चुका है। पत्र में लिखा गया है कि गोरखपुर मेडिकल कॉलेज की घटना को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेना जरूरी है।
ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी को तीन सौ सिलिंडर स्टॉक में रखने को कहा गया है। सिलिंडर रखने के लिए स्टोर पहले छोटा था, अब उसे तुड़वाकर बड़ा करा दिया गया है। दूसरी कंपनी से भी आपूर्ति को लेकर बात की जाएगी। -डॉ. सीपी भैसोड़ा प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज