हल्द्वानी। अब उत्तराखंड की हसीन वादियों में भी सैलानी चिनार की खूबसूरती का दीदार कर सकेंगे। वन अनुसंधान केंद्र ने रानीखेत में चिनार के एक हजार पौधों की नर्सरी तैयार की है। चिनार को रानीखेत के कई इलाकों में रोपा जाएगा।
वन अनुसंधान केंद्र के मुताबिक कश्मीर में पाया जाने वाला चिनार (वानस्पतिक नाम प्लेंटेनस ओरिएनटलिस)1500-2,000 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। अभी तक चिनार हिमालयी राज्यों में अपनी छटा नहीं बिखेर सका है। इधर वन अनुसंधान ने कैंपा योजना के तहत 1500 मीटर ऊंचाई वाले रानीखेत के द्वारसों अनुसंधान केंद्र में नवंबर 2017 में चिनार की कलम लगाई थी। करीब पांच माह बाद इनमें पौधे बनने शुरू हो गए हैं। इस समय नर्सरी में 1,000 चिनार के पौधेे हैं, जो लगातार पनप रहे हैं। सकारात्मक परिणाम को लेकर अनुसंधान अधिकारी उत्साहित है। अब चिनार को रानीखेत में ही ऐसे इलाकों में रोपने की तैयारी की जा रही है जहां देसी विदेशी सैलानी की आमद ज्यादा है। चिनार का लाल से पीला रंग बदलने के विहंगम दृश्य पर्यटकों को अपनी ओर खींच लेते हैं। विभाग फिलहाल गोल्फ मैदान, चाय बागान समेत कई इलाकों का स्थलीय निरीक्षण कर चिनार रोपने की तैयारी कर रहा है।
पर्यटन स्थलों पर रोपे जाएंगे चिनार
वन अनुसंधान अधिकारियों के मुताबिक अगर रानीखेत में चिनार की खूबसूरती पर्यटकों को रिझाने में कामयाब होती है तो दूसरे पर्यटन स्थलों जैसे मसूरी, औली, मुक्तेश्वर, जागेश्वर आदि में भी चिनार को रोपा जाएगा।
अभी नैनीताल में ही है चिनार की कतार
वर्तमान में सिर्फ नैनीताल की माल रोड पर चिनार के कई पेड़ों की कतार है। अभी तक कहीं भी चिनार का बगीचा नहीं है। हालांकि देहरादून, मसूरी आदि में कहीं-कहीं इक्का दुक्का पेड़ दिखाई देते हैं।
रानीखेत में चिनार की 1,000 पौधों की नर्सरी तैयार की है। अब रानीखेत में ही पर्यटक आवक वाले स्थल पर रोपेंगे। यहां के परिणाम के बाद कुमाऊं और गढ़वाल के पर्यटन स्थलों में भी चिनार रोपा जाएगा।
- संजीव चतुर्वेदी, वन संरक्षक, वन अनुसंधान केंद्र