हल्द्वानी। जालसाजों ने दिव्यांग की बेबसी का फायदा उठाते हुए एसटीएच गेट पर उसका एटीएम कार्ड बदल लिया। हल्द्वानी और नोएडा से जालसाजों ने दिव्यांग के खाते से पौने चार लाख रुपये निकाल लिए। दिव्यांग अपनी पत्नी का इलाज कराने आया था। इस मामले में भुक्तभोगी ने एसपी सिटी से मिलकर फरियाद की है। एसपी सिटी ने इस मामले में कार्रवाई करने के लिए अधीनस्थों को निर्देश दिए हैं।
रामपुर जिले के टाडा बादली लक्ष्मीनगर निवासी दिव्यांग विजय सिंह अपनी बीमार पत्नी सुनीता का इलाज कराने के लिए 15 दिसंबर को एसटीएच आया। पत्नी को टाइफाइड, मलेरिया आदि होने पर डॉक्टर ने उसे भर्ती कर लिया। विजय के पास रखे 1200 रुपये खर्च हो गए। दवा खरीदने के लिए रुपये निकालने वह अस्पताल के गेट स्थित एटीएम पर गया। विजय ने पैसा निकालने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। इस पर उसने एटीएम के समीप खड़े दो युवकों से मदद मांगी। एक युवक ने एटीएम मशीन में डालकर कहा कि वह अपने खर्च के अनुसार पैसा भर ले। दिव्यांग ने 4000 रुपये निकाल लिए। इस बीच युवकों ने उसे बदलकर दूसरा एटीएम कार्ड थमा दिया। चूंकि दिव्यांग की ससुराल के लोग रुपये लेकर आए थे। इसी कारण पांच दिन तक उसे रुपयों की जरूरत नहीं पड़ी। पत्नी के डिस्चार्ज होने के बाद दिव्यांग ने रामपुर के टांडा स्थित बैंक से रुपये निकालना चाहा तो पता चला कि खाते में सिर्फ 100 रुपये जमा हैं। यह देख दिव्यांग के होश उड़ गए। बैंककर्मियों ने बताया कि उसके खाते से तीन लाख 80 हजार रुपये हल्द्वानी और नोएडा के एटीएम से निकाले गए हैं। उसके पास मौजूद एटीएम जालसाजों का है। जालसाजों का एटीएम बिजनौर स्थित बैंक का है। शुक्रवार हल्द्वानी मेडिकल चौकी में आकर दिव्यांग ने पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। मेडिकल चौकी प्रभारी हरेंद्र सिंह नेगी ने सीसीटीवी में जांच की तो पाया कि दिव्यांग के पीछे दो युवक लगे हैं। दिव्यांग ने जालसाजों को पकड़ने के लिए एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव से गुहार लगाई।
फैक्ट्री में एक हाथ कटने पर मिले थे चार लाख
हल्द्वानी। भुक्तभोगी विजय ने बताया कि वह रामपुर स्थित विंड्स इंडिया फैक्ट्री में काम करता था। पिछले साल 18 जनवरी 16 को फैक्ट्री में काम करते समय उसका एक हाथ कट गया। इस मामले में कंपनी ने इलाज के लिए उसे चार लाख रुपये की राहत राशि प्रदान की थी। उसने 20 हजार रुपये राहत राशि का खर्च किया था। अभी उसका इलाज चल रहा है। भुक्तभोगी विकलांग पैसा गंवाने के बाद कोतवाली में रो रहा था। पुलिसकर्मियों को भी उस पर दया आ गई। मेडिकल चौकी प्रभारी हरेंद्र सिंह नेगी ने उसकी मदद का आश्वासन देकर चुप कराया।