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हमारी चिंता छोड़ दें, अपने नगर निगम को सुधारे

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हल्द्वानी। गांवों को नगर निगम में शामिल करने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हरिपुर नायक ग्राम सभा लोगों का आरोप है कि उनके गांव को राजनीति की भेंट चढ़ाया गया है। उनके गांव में 61 प्रतिशत के करीब खेती योग्य भूमि है। 75 प्रतिशत ग्रामीण जनता खेती, मुर्गीपालन और पशुपालन में लगी है। इसके बाद भी उनके गांव को नगर निगम में शामिल कर दिया गया।
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सोमवार को अमर उजाला की टीम ने जब हरिपुर नायक गांव का जायजा लिया तो पाया कि यहां कमलुवागांजा सड़क के किनारे तो मकान बने हुए हैं। लेकिन अंदर बड़े क्षेत्र में खेती की जा रही है। कुछ क्षेत्र में जरूर कालोनी कटी है। लेकिन अधिकांश प्लाट खाली हैं। लोगों का कहना था कि ब्लॉक प्रमुख को राजनीतिक मात देने के लिए उनके गांव को नगर निगम में शामिल किया गया। नियमों की बात करें तो इस गांव में कहीं से भी शहरी गुण विद्यमान नहीं है। न ही क्षेत्र का आर्थिक महत्व है। आधे गांव में 250 व्यक्ति प्रति किलोमीटर जनसंख्या घनत्व भी नहीं है।

गांव में सफाई और सीवर की कोई समस्या नहीं
हरिपुर नायक गांव में साफ-सफाई की कोई समस्या नहीं है। ग्रामीणों ने कहा कि सीवर के लिए उनके अपने गड्ढे हैं। कूड़े की कोई समस्या नहीं है। सड़कें सही हैं। नगर निगम में शामिल होने के बाद 4600 की आबादी में एक पार्षद होगा। गांव की जनसंख्या कम है। इस हिसाब से इसमें शहर भी शामिल होंगे। पार्षद के क्षेत्र में पैसा भी कम आएगा। ऐसे में गांव का विकास तो होने से रहा। ऐसे नगर निगम का क्या फायदा हुआ।
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गूलों और नहरों की मरम्मत होना मुश्किल
निगम में शामिल होने का मतलब है अव्यवस्था। हम नहीं चाहते कि हम लोग महज टैक्स देते रहें। गूलों व नहरों की मरम्मत होना मुश्किल है वहीं विकास होने के बजाय लोगों को हर कार्य के लिए चक्कर लगाने पडे़ंगे।
- अमर सिंह

गांवों को निगम में शामिल नियमों को ताख पर रख कर राजनीति फायदा उठाने के लिए किया गया। भाजपा लोकतंत्र की बात करती है। लेकिन न तो जनता की राय सुनी गई। न ग्राम प्रधान की ओर से भेजी गई आपत्तियों की सुनवाई की गई।
-भोला दत्त भट्ट ब्लॉक प्रमुख

आज से दस साल पहले विकास प्राधिकरण बन जाता तो अच्छा था अब इस नगर निगम की गांव वालों को कोई आवश्यकता नहीं है। हमारे सारे काम अच्छी तरह से चल रहे हैं। सरकार अपना वोट बैंक देख रही है पर जनता इसका जवाब देने को तैयार बैठी है।
पार्वती खनी, ग्राम प्रधान

बिना सर्वे किए गांव को निगम में शामिल कर दिया शायद पूरा प्रकरण राजनीति से प्रेरित है। हम लोग अपने गांव को निगम में शामिल किए जाने के खिलाफ हैं अगर जबरदस्ती की गयी तो मातृ शक्ति धरने पर बैठने को बाध्य होगी।
-खष्टी देवी

हमें तो गाय के गोबर तक का टैक्स देना पड़ेगा। भला हमें क्या फायदा, निगम पहले हल्द्वानी की व्यवस्था ठीक से संभाले उसके बाद गांवों में पैर पसारने की सोचे।
-उमेश चंद्र जोश

हमारे गांव में सारी सुख सुविधाएं हैं हमें और ज्यादा विकास की जरुरत नहीं है। तानाशाही आदेश है ऐसे फरमान की हमें कोई परवाह नहीं। हम जब सड़क पर उतरेेंगे तब सरकार को सोचना पडे़गा।
- कैलाश पाठक

वार्ड 23 में लंबे समय से नालियों की नहीं हुई सफाई
वार्ड नंबर 23 बनभूलपुरा लाइन नंबर एक से सात तक कई सालों से नालियों की सफाई नहीं हुई है। इस क्षेत्र की कई गलियों में अभी तक सीवर लाइन नहीं बिछ पाई है। लोगों का कहना है कि अधिकारी सफाई कर्मचारी कम होने की बात करते हैं।

घर-घर कूड़ा नहीं उठाया जा रहा
दो साल से नालियों की सफाई नहीं हुई है। बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पास होने के बाद भी मेयर की ओर से सफाई कर्मचारी नहीं दिए गए। वार्ड से घर-घर कूड़ा नहीं उठाया जा रहा है। नगर निगम में कई करोड़ की गाड़ियां धूल फांक रही हैं। -मो. गुफरान पार्षद

वार्ड में गंदगी का अंबार रहता है जब कोई नेता आता है तभी गलियां चमकी दिखती हैं वरना यहां तो कोई झांकने नहीं आता। -मेंहदी हसन

साफ-सफाई तब होती है जब अखबारों में खबरें आती हैं वरना यहां तो बहुत बुरा हाल है। हम लोग खुद एकत्र हो कर सफाई करते हैं। -नयाज अहमद

लोगों ने नालियों पर अतिक्रमण किया हुआ है इसकी वजह से भी नालियां चोक हैं मगर सफाई कर्मी भी कभी कभार ही आते हैं, निगम की सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। - मोईन

अखबार में जब खबरें आती हैं तभी निगम को सफाई की याद आती है, कूड़ा उठाने की गाड़ी भी नहीं आती, लोगों द्वारा एकत्र किया गया कूड़ा भी हवा के झोंकों से गलियां नापते रहता है। -असगर हुसैन

व्यवस्था काम चलाऊ है। अफसर कभी दौरा क रें तब उन्हें खामियां पता चलें, नाली चोक हैं, पाइप र्र्र्लाईन गंदगी से पटी पड़ी हैं मगर कोई सुधलेवा नहीं है। -हाजी मो. यूनुस

निगम के लिए यह हैं चुनौतियां -
- निगम कार्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर सीवर लाइन कैसे पड़ेगी। निगम बने 10 साल होने को हैं, इसके बावजूद निगम के कई वार्डों में सीवर लाइन नहीं है।
- शहर के मुख्य मार्ग कालाढूंगी रोड पर स्ट्रीट लाइट नहीं है, ऐसे में गांवों में कब लाइट लग पाएगी।
- सफाई के मामले में निगम फिसड्डी है, गांवों की सफाई कैसे होगी
- निगम की रोड खुद खस्ता हाल है, नए गांव की सड़कें कैसे बनेंगी

हमारे मंच से आप अपनी बात कह सकते हैं-
हल्द्वानी। नगर निगम की सीमा में 36 गांव को शामिल कर दिया गया है। किन मानकों के आधार पर इन्हें शामिल किया गया, यहां के नागरिक कैसा महसूस कर रहे हैं, नगर निगम की तैयारियों की जमीनी हकीकत क्या है। गांव दर गांव इन सवालों के जवाब खोजने के साथ ही अमर उजाला की टीम रोज एक वार्ड की चुनौतियों और समस्याओं का भी जायजा लेगी। बुधवार को अमर उजाला की टीम होगी छड़ायल नायक और भोटिया भड़ाव वार्ड नंबर 11 में। बृहस्पतिवार को भगवानपुर बिचला और वार्ड नंबर आठ बाजार क्षेत्र में।
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