हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में संवेदनहीन हो चुके एक विभाग और उसके डॉक्टरों की लापरवाही के कारण 45 वर्षीय बाबा जीवन के लिए तरस रहा है। बाबा के शरीर में एक वर्ष से अस्पताल में पड़े-पड़े घाव हो चुके हैं मगर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
एनस्थीसिया विभाग की कारगुजारी एसटीएच प्रबंधन के सिर चढ़कर बोल रही हैं। चिकित्सा-शिक्षा निदेशक, प्राचार्य और एमएस सभी मूकदर्शक बने हुए हैं। एसटीएच में शिवराज महाराज (45) को जुलाई 2016 में स्पाइन में फ्रेक्चर होने के कारण भर्ती कराया गया था। बाबा के दोनों पैरों में पैरालिसिस हो गया था। बाबा के आगे-पीछे कोई नहीं है। बाबा को न्यूरो सर्जन डॉ. दीपक पंवार की देखरेख में भर्ती किया गया था। 09 जुलाई 2016 को बाबा की एमआरआई की रिपोर्ट आई थी। सूत्रों की मानें तो बाबा की सर्जरी के लिए चैरिटी से इंम्प्लांट और दवाओं की व्यवस्था हो गई थी और नौ अगस्त 2016 को बाबा की सर्जरी होनी थी। एनस्थीसिया विभाग की दो जेआर तृतीय ने आठ अगस्त 2016 वेंटीलेटर बेड की उपलब्धता न होने के कारण मरीज को हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया। एक बार फिर न्यूरो सर्जन की कोई सहमति नहीं ली गई और एनस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों ने अपनी मनमानी की। बाबा पिछले एक वर्ष से जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। एक वर्ष से बिस्तर पर पड़े रहने के कारण बाबा के शरीर पर फोड़े हो चुके हैं। बाबा की स्थिति अब गंभीर है और उसे देखने वाला कोई नहीं है।
इनसेट
प्राचार्य के बोल
हल्द्वानी। राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा से जब इस संबंध में पूछा गया तो बोले कि केस बहुत जटिल था। बाबा को बाहर रेफर किया गया था। बाबा का परिवार नहीं है इसलिए अस्पताल में पड़े हुए हैं। हमने अस्पताल में एक वर्ष से रख रखा है।