डीडीहाट (पिथौरागढ़)। पिथौरागढ़ जिले के अंतिम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देव सिंह डसीला का 97 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। बुधवार देर शाम डीडीहाट स्थित आवास में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन पर पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
मूल रूप से डीडीहाट के कौली गांव निवासी देव सिंह डसीला पिछले कुछ दिनों से पैर में संक्रमण की समस्या से जूझ रहे थे। बार-बार बेहोशी की शिकायत पर कुछ दिन पहले उन्हें बरेली स्थित राममूर्ति अस्पताल में भर्ती किया गया था। उपचार के बाद घर लौटे डसीला की हालत पिछले दो दिन से खराब थी। बुधवार की शाम 8.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। वह अपने पीछे 94 वर्षीय पत्नी डिगरी देवी, पुत्र रिटायर्ड सूबेदार जीवन सिंह डसीला, पुत्रवधू और दो पोतों का भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं।
उनके निधन का समाचार मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर पुस्तक लिखने वाले शिक्षक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के पदाधिकारी राजेश मोहन उप्रेती ने बताया कि देव सिंह डसीला जिले के अंतिम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उन्होंने बताया कि पिथौरागढ़ जिले में 215 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। इनमें से 115 आईएनए के सेनानी थे। उन्होंने डसीला के निधन को अपूरणीय क्षति बताया है।
एक माह तक जंगल में खाई थी घास की रोटियां
डीडीहाट। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देव सिंह डसीला ने अंग्रेजी हुकूमत से देश को आजाद करने के लिए कई कष्ट झेले थे। डसीला 1932 में ब्रिटिश सेना में भर्ती हुए थे। उसी दौरान देश भर में चले स्वतंत्रता आंदोलन से प्रभावित होकर उन्होंने बगावत कर दी और सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए। आजाद हिंद फौज में अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए उन्होंने अन्य सेनानियों के साथ लंबी लड़ाई लड़ी। इस दौरान उन्हें कई दिनों तक जंगलों में छुपना पड़ा। खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं होने से उन्होंने घास की रोटियां खाकर जान बचाई थी। देश की आजादी के बाद वह अपने गृह क्षेत्र डीडीहाट आ गए। डीडीहाट में उन्होंने सुभाष चंद्र बोस के नाम से एक कलौनी बनाई और एक चौक पर बोस की मूर्ति लगाकर उस चौक का नाम सुभाष चौक नाम रखा। सेनानी डसीला अस्वस्थ होने के बावजूद स्वतंत्रता दिवस सहित सभी राष्ट्रीय कार्यक्रमों में आवश्यक रूप से शामिल होते थे। सेनानी डसीला बेहद सीधे और सरल स्वभाव के थे। डीडीहाट जिला बनाने की मांग को लेकर भी वे लगातार मांग उठाते रहे थे।