हल्द्वानी। संगीत नाटक अकादमी और हिमालयन संगीत शोध समिति की ओर से तीन दिनों तक देश के विभिन्न प्रांतों की लोकसंस्कृति की धूम मचेगी। इसे देशज महोत्सव नाम दिया गया है जो कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती को समर्पित है।
अकादमी के क्षेत्रीय सलाहकार अमित सक्सेना और समिति के डॉ. पंकज उप्रेती ने बताया कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य देश में लुप्त हो रही विभिन्न प्रांतों की लोक संस्कृति के बारे में लोगों को जागरूक करना है। देशज उत्सव में देशभर के 60 से अधिक लोक कलाकार प्रस्तुति देंगे। उन्होंने बताया कि पांच साल पहले संगीत नाटक अकादमी की ओर से देश के लोक एवं जनजातीय संगीत, नृत्य और नाट्य के विविध रूपों से जुड़े कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए देशज महोत्सव शुरू किया था। संस्था दिल्ली, पटना, हैदराबाद, जमशेदपुर, दरभंगा, आजमगढ़, इंफाल, कानपुर, कुरुक्षेत्र आदि में उक्त महोत्सव कर चुकी है। महोत्सव का शुभारंभ मंगलवार को सांय छह बजे पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच में होगा। उपनिदेशक सूचना योगेश मिश्रा ने भी इस कार्यक्रम की सराहना की। इस मौके पर धीरज उप्रेती, तनुज उपाध्याय, देवेंद्र पांडे, योगेश उपाध्याय, पंकज जोशी, मनमोहन वर्मा, संतोष पांडे, विकास जोशी, पूजा लटवाल, संगीता बिष्ट, आशुतोष आदि थे।
60 से अधिक कलाकार कई राज्यों की लोक संस्कृति की पेश करेंगे
तीन दिवसीय महोत्सव राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती को है समर्पित
कार्यक्रम
- 02 अक्तूबर मंगलवार
उत्तराखंड का घस्यारी नृत्य, राजस्थान का कालबेलिया नृत्य, पंजाब का भांगड़ा, मणिपुर का थांग-टा एवं ढोल चोलम, हरियाणा का फाग नृत्य और उत्तराखंड का झोड़ा।
- 03 अक्तूबर
उत्तराखंड का रम्माण लोक नृत्य, उत्तर प्रदेश का फरवाई नृत्य, मध्य प्रदेश का बरेदी नृत्य, असम का बीहू नृत्य, तेलंगाना का माधुरी नृत्य, हिमाचल प्रदेश का सिरमौरी नाटी नृत्य।
- 04 अक्तूबर
उत्तराखंड का छपेली नृत्य, जम्मू कश्मीर का बोनोना लोक गीत एवं नृत्य, उत्तराखंड का ढुस्का नृत्य, त्रिपुरा का धमाईल, बीजू नृत्य, कर्नाटक का करडी नृत्य वन उत्तराखंड का नंदा राजजात।