हल्द्वानी। कैलाश मानसरोवर की यात्रा पूरी कर तीसरे और चौथे दल के यात्रियों को सोमवार को कुमाऊं मंडल विकास निगम के अधिकारियों ने पर्यटक आवास गृह काठगोदाम में स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया। मौसम और पैदल मार्ग की खराबी के कारण यह यात्री कई दिन तक गुंजी में फंसे थे।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी कर लौटे तीसरे दल में 13 महिलाओं समेत 59 यात्री थे, जबकि चौथे दल में 16 महिलाओं समेत 56 यात्री शामिल थे। काठगोदाम टीआरसी में केएमवीएन के प्रबंध निदेशक धीराज गर्ब्याल, महाप्रबंधक त्रिलोक सिंह मर्तोलिया, प्रबंधक रमेश चंद्र पांडे और सहायक प्रबंधक दीपक पांडे ने यात्रियों का स्वागत किया। होम स्टे व्यवस्था से यात्री काफी प्रसन्न नजर आए। यात्री दल बाद में दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
डिस्कवर कुमाऊं विद केमएवीएन किताब का विमोचन
हल्द्वानी। काठगोदाम में कैलाश यात्री दलों की मौजूदगी में कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक धीराज गर्ब्याल ने पुस्तक का विमोचन किया। सभी यात्रियों को यह पुस्तक भेंट की गई। पुस्तक में कुमाऊं के सभी पर्यटक स्थलों, रीति रिवाज, खानपान, मेले, तीज, त्यौहार, रहन-सहन, परंपराएं आदि की विस्तृत जानकारी है। इसमें कुमाऊं के इतिहास को भी इसमें समेटा गया है। पुस्तक को पढ़कर कुमाऊं को समझने में काफी मदद लोगों को मिलेगी।
कैलाश मानसरोवर यात्रियों से बातचीत
मुंबई के सुभाष मात्रे ने कहा कि इस बार चीन में यात्रियों को मानसरोवर में डुबकी नहीं लगाने दी गई। इसकी कमी महसूस हुई। उन्होंने यात्रा को बेहद सुखद बताया।
दूसरी बार यात्रा पूरी कर लौटे मुंबई के भानुदास मोयेर ने कहा कि इस बार मानसरोवर झील में डुबकी लगाने पर प्रतिबंध लगाया है। बाल्टियों से पानी निकालकर नहाना पड़ा। उन्होंने 2009 में भी कैलाश यात्रा की है।
डेरापुक (चीन) में खुले में करना पड़ता है शौच
गाजियाबाद के यात्री संजय ने बताया कि चीन में अन्य व्यवस्थाएं तो ठीक हैं लेकिन डेरापुक और जुंगजुंग में शौचालय नहीं हैं। डेरापुक में तो महिलाओं को भी खुले में शौच करना पड़ा। यह कमी बहुत खली।
भारतीय क्षेत्र में सुविधाएं बेहतर
देहरादून की नीलम रावत ने बताया कि यात्रा मार्ग में भारतीय क्षेत्र में अच्छी सुविधाएं मिलीं। चीन में शौचालय की समस्या बहुत अखरी। कुमाऊं मंडल विकास निगम की व्यवस्थाएं बहुत अच्छी थीं।