हल्द्वानी। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रदेश सरकार पिछले कई वर्षों से बड़े-बड़े दावे कर रही है। स्वास्थ्य सेवाओं में धरातल पर सुधार के नाम पर कुछ नहीं दिखाई दे रहा है। सबसे अधिक ओपीडी वाले बेस अस्पताल में डॉक्टर के कई स्वीकृत पद वर्षों से खाली पड़े हैं।
बेस अस्पताल में प्रतिदिन 800 से लेकर 1200 मरीज ओपीडी में आते हैं। बेस अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ, न्यूरो सर्जन, पैथालाजिस्ट और ईएनटी सर्जन तक नहीं है। अस्पताल में डिजिटल एक्सरे मशीन और दांतों के एक्सरे के लिए ओरल पेंटोग्राम (ओपीजी) मशीन तक नहीं है। स्वीकृत पदों पर शासन से अभी तक कोई तैनाती नहीं हुई है। सुशीला तिवारी अस्पताल में भी हृदयरोग विशेषज्ञ, न्यूरो फिजीशियन और सर्जन तक नहीं है। ऐसे में मरीजों को इलाज के निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है।
एसटीएच में दी जा रही सिर्फ दाल-रोटी
हल्द्वानी। मरीजों को खाना देने के एवज में आज से 20 वर्ष पुराने दरों पर कैंटीन संचालक को भुगतान किया जा रहा है। एक मरीज के खाने के एवज में महज 50 रुपये दिए जा रहे हैं। मरीज को खाने में भी सिर्फ दाल, चावल, रोटी और सब्जी ही दी जा रही है। सुबह के नाश्ते में ब्रेड और चाय, जबकि शाम को भी सिर्फ चाय दी जाती है। रात के खाने में भी दाल, चावल, रोटी और सब्जी दी जाती है।
ऐसे में सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता क्या होगी। कैल्शियम, फाइबर, आयरन युक्त कोई भी खाद्य पदार्थ मरीजों को नहीं मिल पाता है। इस संबंध में राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा का कहना है कि कैंटीन संचालक से उत्तर प्रदेश के मेडिकल कालेज की दरें लाने को कहा है। वहां की दरें देखने के बाद प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा कि दरें बढ़ाई जाएं ताकि मरीजों को बेहतर खाना दिया जा सका।
ये होना चाहिए प्रतिदिन के खाने में
आईएमए हल्द्वानी के अध्यक्ष डॉ. मोहन तिवारी ने बताया कि सुबह के नाश्ते में अंडे और दूध या दलिया और ब्रेड होना चाहिए। जबकि एक फल भी होना चाहिए। खाने में रोटी, दाल, चावल, हरी सब्जी, दही होना चाहिए। शाम की चाय के साथ मूंग की दाल और बिस्कुट दिए जाने चाहिए।
विश्व स्वास्थ्य दिवस आज
पद स्वीकृत होने के बाद भी शासन आज तक तैनात नहीं कर सका डॉक्टर
कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट और ईएनटी सर्जन नहीं हैं