हल्द्वानी। लगता है शासन की मर्जी के आगे उच्चशिक्षामंत्री के आदेश भी कोई मायने नहीं रखते। महाविद्यालयों में तैनात 253 अतिथि शिक्षकों का कार्यकाल बढ़ाने की अवधि का शासन से आए आदेश 15 दिन बाद भी जारी नहीं किया है। इस कारण अतिथि शिक्षक बिना किसी आदेश के महाविद्यालयों में कार्य कर रहे हैं।
शासन ने शिक्षकों की कमी को देखते हुए पिछले वर्ष नया शिक्षा सत्र शुरू होने पर सभी महाविद्यालयों को अतिथि शिक्षक रखने के आदेश दिए थे। इन अतिथि शिक्षकों को प्रति वादन पांच सौ रुपये के हिसाब से मानदेय दिया जाना था। हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज समेत दूसरे महाविद्यालयों में अक्तूबर-नवंबर के दौरान 253 अतिथि शिक्षकों को रखा गया था। इन अतिथि शिक्षकों को शासन ने प्राचार्यों को ही अतिथि शिक्षकों को मौखिक तौर पर रखने के लिए अधिकृत किया था। इन शिक्षकों की सेवा अवधि 28 फरवरी को समाप्त हो चुकी है।
पिछले दिनों हल्द्वानी दौरे पर आए उच्चशिक्षामंत्री डॉ. धन सिंह रावत के समक्ष अतिथि शिक्षकों ने सेवा अवधि को 30 अप्रैल तक बढ़ाने की मांग की थी। मंत्री ने उच्चशिक्षा निदेशालय को इस संबंध में प्रस्ताव भेजने के आदेश भी दिए थे। उच्चशिक्षा निदेशालय ने 26 फरवरी को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया था। 15 दिन बीतने के बाद भी शासन से सेवा अवधि बढ़ाने संबंधी अब तक कोई आदेश जारी नहीं हो सका है।
उच्चशिक्षा निदेशालय ने अतिथि शिक्षकों का समय 30 अप्रैल तक बढ़ाने के लिए 28 फरवरी से पहले ही प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया था स्वीकृति अब तक नहीं आई है। फाइल कहां दबी है, कुछ पता नहीं चल पा रहा।
- डॉ. सविता मोहन, निदेशक उच्चशिक्षा