ध्यानार्थ... दून
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44 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति
निरस्त करने संबंधित फैसला सही
उच्च न्यायालय ने घुड़दौड़ी इंजीनियरिंग कॉलेज प्रबंध समिति का फैसला सही माना
अमर उजाला ब्यूरो
नैनीताल।
उच्च न्यायालय ने घुड़दौड़ी इंजीनियरिंग कॉलेज पौड़ी में 44 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया के मामले में प्रबंध समिति के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। न्यायालय ने नियुक्ति प्रक्रिया को निरस्त करने के प्रबंध समिति के आदेश को सही ठहराया है। मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
पौड़ी निवासी महावीर सिंह व अन्य की ओर से मामले से संबंधित चार याचिकाएं दाखिल की गई थीं। याचिका में कहा गया था कि आठ जून 2015 को प्रबंध समिति घुड़दौड़ी इंजीनियरिंग कॉलेज ने 44 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया को निरस्त कर दिया था। समिति ने नए सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ करने का फैसला किया था। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि प्रबंध समिति का यह निर्णय गैर कानूनी है। प्रबंध समिति को किसी भी प्रकार नियुक्ति प्रक्रिया को निरस्त करने का अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने प्रबंध कमेटी की बैठक में विशेष आमंत्रित सदस्य को बुलाने को भी अवैधानिक करार दिया। राज्य सरकार व इंजीनियरिंग कॉलेज की ओर से सुभाष उपाध्याय ने न्यायालय को बताया कि नियुक्ति प्रक्रिया में अखिल भारतीय तकनीकी परिषद (एआईसीटी) के नियम बाध्यकारी हैं। उक्त चयन प्रक्रिया में इनका अनुपालन नहीं किया गया। मामला पूर्व में भी न्यायालय के समक्ष आया था और न्यायालय ने ही प्रबंध समिति को इस प्रकरण को सुनने के अधिकार दिए थे। नियुक्ति प्रक्रिया को अवैधानिक पाते हुए ही इसे निरस्त किया गया। उन्होंने विशेष आमंत्रित सदस्य संबंधी मामले में कहा कि उप समिति सदस्य के रूप में सभी की सहमति प्राप्त करने के लिए ही उन्हें बैठक में बुलाया गया था। नियुक्ति प्रकरण से उक्त सदस्य का कोई सरोकार नहीं है।