फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एचएन इंटर कॉलेज बाउंड्री से सटी 40 दुकानें हटेंगी 

Mon, 24 Apr 2017 01:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी।
विज्ञापन
चंद्रभागा नदी तट पर वनभूमि पर लगे अवैध टुल्लू पंपों को हटाते विभागीय टीम। - फोटो : amar ujala.
विज्ञापन
हल्द्वानी । एचएन इंटर कॉलेज की चहारदीवारी से सटी वन भूमि पर अवैध ढंग से बनाई गई 40-42 दुकानें हटेंगी। वन महकमे ने कॉलेज प्रबंधन की उक्त 5.23 एकड़ भूमि की लीज निरस्त करते हुए कब्जे हटा कर भूमि वन महकमे को सौंपने की मांग की है। लीज निरस्त होने के करीब 21 साल बाद वन महकमे की नींद टूटी है। तराई केंद्रीय वन डिवीजन ने हरिदत्ता नित्यानंद इंटर कॉलेज को लीज पर कुल 12.23 एकड़ जमीन दी थी।
विज्ञापन


यह जमीन 3, 4, 5.23 एकड़ तीन लीज में दी गई थी। लीज में शर्त थी कि भूमि का उपयोग शिक्षण के लिए ही किया जाएगा। करीब 26 साल पूर्व 1990-91 में लीज की शर्तों का उल्लंघन हुआ और कॉलेज की बाउंड्री से सटी वन भूमि पर अवैध ढंग से दुकानों का निर्माण किया। देखते ही देखते यहां एक के बाद एक 40 दुकानें बन गई। इनमें मेडिकल स्टोर, रेस्टोरेंट, मोबाइल रिचार्ज, सब्जी, मीट, फोटो स्टेट आदि की दुकानें है।

वन अफसरों ने 5.23 एकड़ भूमि की लीज निरस्तज करते हुए कॉलेज प्रबंधन से वन भूमि से वैध व अवैध कब्जे हटाकर भूमि को वन महकमे के सुपुर्द करने को पत्र लिखा। इस कार्रवाई के विरोध में 1995-96 में कॉलेज प्रबंधन ने बेदखली के लिए सिटी मजिस्ट्रेट के यहां केस दायर किया। सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद 19 जून 2000 को वन महकमे के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कालेज प्रबंधन को बेदखल कर जमीन वन महकमे को सौंपने के आदेश दिए।
विज्ञापन


इस फैसले के विरोध में कॉलेज प्रबंधन ने जिला एवं सत्र न्यायालय की अदालत में अपील की। यहां भी कोर्ट ने दो साल की सुनवाई के बाद 2002 में कालेज प्रबंधन की अपील को खारिज कर दिया। इसके बाद वन डिवीजन ने कालेज प्रबंधन को पत्र लिखकर उक्त भूमि सौंपने को लिखा। अब यह जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। तराई केंद्रीय वन डिवीजन ने कॉलेज प्रबंधन से दुकानों के अवैध निर्माण हटाकर भूमि वन महकमे को सुपुर्द करने को पत्र लिखा है। साथ ही आला अफसरों से भी पत्र लिख कर इस पर कार्रवाई के दिशा निर्देश मांगे जा रहे हैं। हद यह रही कि  कोर्ट ने एक दशक पूर्व वन महकमे के हक में फैसला होने के बाद भी अफसरों ने सिर्फ कालेज प्रबंधन से पत्राचार ही किया। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें