रामनगर। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व का जंगल वन्यजीवों के लिए सुरक्षित पनाहगाह है, लेकिन इसकी सुरक्षा करने वाले वनकर्मियों के लिए हर दिन चुनौती भरा होता है। बाघ, हाथी और विषैले सांपों के बीच गश्त से लेकर शिकारियों और अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के दौरान अब तक कॉर्बेट में 33 वनकर्मी अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं वन शहीद दिवस पर इन वन प्रहरियों के बलिदान को याद किया जाता है।
बाघों के बढ़ते शिकार को रोकने के लिए कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की स्थापना की गई। वहीं इस पूरे जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा वनकर्मियों को कंधे पर रहती है। इसी के चलते कॉर्बेट का जंगल देश-दुनिया में बाघों और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आश्रय के रूप में जाना जाता है, लेकिन इस जंगल की सुरक्षा की कीमत कई वनकर्मियों ने अपनी जान देकर चुकाई है। जंगल, वन्यजीव और संरक्षण की ड्यूटी निभाते हुए अब तक 33 वनकर्मी शहीद हो चुके हैं। इनमें अधिकतर वनकर्मियों की जान बाघ और हाथी के हमले के साथ जहरीले सर्पदंश भी गई है।
शहीदों की स्मृति में बनाया स्मारक
कॉर्बेट के जंगल की सुरक्षा में शहीद वनकर्मियों की स्मृति में पार्क प्रशासन की ओर से धनगढ़ी में वन शहीद स्मारक बनाया गया है। यहां हर वर्ष 11 सितंबर को वन शहीद दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है। यह आंकड़ा बताता है कि जंगल की सुरक्षा में तैनात फ्रंटलाइन कर्मचारियों के सामने कितने बड़े खतरे मौजूद रहते हैं।
850 से अधिक कर्मचारी संभाल रहे सुरक्षा
मौजूदा समय में भी कॉर्बेट के जंगलों की सुरक्षा का 850 से अधिक जिम्मा सैकड़ों कर्मचारियों के कंधों पर है। इसमें करीब 500 दैनिक कर्मी, 230 वन रक्षक, 100 फॉरेस्टर, 15 रेंजर और चार एसडीओ समेत अन्य अधिकारी संरक्षण कार्यों में जुटे हैं।
पार्क की सुरक्षा के लिए हाईटेक तकनीक के साथ ही फील्ड स्टाफ 24 घंटे तैनात है। बढ़ती सुरक्षा के कारण ही सीटीआर बाघ समेत अन्य वन्यजीवों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है। - डॉ साकेत बडोला, निदेशक, सीटीआर