भीमताल (नैनीताल)। शीतजल मत्स्य अनुसंधान निदेशालय (डीसीएफआर) में शुक्रवार को तीन दिवसीय मछली पालन एवं उन्नत प्रबंधन विधियों का कार्यक्रम शुरू हुआ।
राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड हैदराबाद की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में ओमेगा 3 फेटीऐसीड मछली की विशेषता बताई गई। इस मछली को पौष्टिक आहार के महत्वपूर्ण बताया। किसानों से मछली पालन का आह्वान किया गया। मछली पालन के लिए पंचायतों, गांवों की तालाबों, नहरों, नदियों, झीलों के लिए लाभदायक बताया। वैज्ञानिकों ने कहा कि देशभर में करीब 50 मत्स्य प्रजातियां पाली जा रही हैं। इनसे प्रतिवर्ष 33 हजार करोड़ से अधिक मछली एवं मछलियों से संबधित उत्पाद 75 देशों में निर्यात किए जा रहे हैं। दुनिया में 11 मिलियन टन मत्स्य उत्पादन के साथ भारत दूसरे स्थान पर है। कार्यक्रम में चंपावत, मनान, सिक्किम, मेघालय, लेह लद्दाख, असोम आदि राज्यों से 25 महिलाओं सहित 50 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में महाशीर मछलियों की उपयोगिता, मछलियों के प्रज्जन बीज, बीज उत्पादन की जानकारी दी गई। निदेशक डीके शर्मा ने सभी प्रतिभागियों को मछली उत्पादन कर लाखों रुपये कमाने को कहा। इस दौरान डॉ. सुरेश चंद्रा, डॉ. डी बरुआ, एके जोशी, डॉ. एस अली, डॉ. आरएस पतियाल, डॉ. बीजू साम कलम आदि थे।