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वन आरक्षी एवं वन बीट अधिकारी संघ

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हल्द्वानी। वन दरोगा की भर्ती में 33 फीसदी सीधी भर्ती के विरोध में प्रदेश के 3650 वन आरक्षियों ने बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी है। वन आरक्षियों के कार्य बहिष्कार से जंगल में गश्त से लेकर दफ्तरों में काम काज ठप हो गया है। वन आरक्षी एवं वन बीट अधिकारी संघ के बैनर तले तराई केंद्रीय, तराई पश्चिमी, तराई पूर्वी, हल्द्वानी, रामनगर, वानिकी प्रशिक्षण अकादमी के फील्ड और आफिस में तैनात 800 वन आरक्षी मंगलवार से हड़ताल पर चले गए। तिकोनिया स्थित वन संरक्षक के कार्यालय प्रांगण में वन आरक्षियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। आरक्षियों ने कहा कि पूर्व में वन आरक्षी की ही शत प्रतिशत वन दरोगा के पद पर पदोन्नति होती थी। अब सरकार ने 33 फीसदी सीधी भर्ती कर दिया है। इससे वन आरक्षियों के प्रमोशन में कैंची चली है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं वन दरोगा का पद रिक्त होने पर भी वन आरक्षी के 10 साल पूरे होने पर पदोन्नति के तानाशाह रवैये से आरक्षी का नुकसान होगा। हड़ताल करने वालों में नवीन सिंह, कमलेश, दिनेश पांडे, राकेश सती, गीता बिष्ट, बेबी जोशी, पुष्पा तिवारी, गीता कालाकोटी, ललिता पाठक, ललिता नेगी, महेश चंद्र, उर्मिला टम्टा, ममता गोस्वामी आदि मौजूद थी।
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वन दरोगा की भर्ती में 33 फीसदी सीधी भर्ती के विरोध में वन आरक्षी गुस्से में
800 वन आरक्षी पश्चिमी वन वृत्त के हैं हड़ताल पर, वन वन प्रभागों का कामकाज प्रभावित

दो संगठनों ने दिया समर्थन
सहायक वन कर्मचारी संघ और राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने भी हड़ताल को समर्थन दे दिया है। उन्होंने वन आरक्षियों की मांगें पूरी नहीं होने पर हड़ताल की चेतावनी दी है। इस दौरान दीवान सिंह रौतेला, इंदर लाल आदि मौजूद थे।

वार्ता के लिए दून रवाना हुए प्रांतीय पदाधिकारी
प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने वन आरक्षियों की हड़ताल खत्म करने के लिए एक प्रतिनिधि मंडल को वार्ता के लिए बुलाया है। इस पर प्रांतीय अध्यक्ष शशि वर्धन अधिकारी के नेतृत्व में चार सदस्यीय दल दून रवाना हो गया है।
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