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अस्पताल अब ग्रामीण इलाकों में बांट रहे हैं बीमारी

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हल्द्वानी। जैव चिकित्सीय कचरे को इधर-उधर फेंकने के मामले में कई अस्पताल सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। शुक्रवार को शिवालिक स्कूल के पास ही एक खाली प्लाट में कई क्विंटल जैव चिकित्सीय कचरा भी पाया गया। सूचना मिलने पर अपर जिलाधिकारी और नगर आयुक्त हरबीर सिंह भी यहां पहुंचे तो मामला पुष्ट भी हो गया। इस कचरे में शहर के एक प्रतिष्ठित अस्पताल के पर्चे भी मिले हैं।
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नगर निगम के ट्रंचिंग ग्राउंड में जैव चिकित्सीय कचरे को फेंकने पर लगी रोक के बाद शहर के कुछ प्रतिष्ठित अस्पतालों ने ग्रामीण क्षेत्रों में जैव चिकित्सीय कचरा फेंकना शुरू कर दिया है। एडीएम और नगर आयुक्त हरबीर सिंह को शुक्रवार को सूचना मिली थी कि आरटीओ रोड शिवालिक स्कूल के बगल में खाली पड़े प्लाट में जैव चिकित्सीय कचरा पड़ा है। वह मौके पर पहुंचे। उन्होंने पाया कि प्लाट में कई क्विंटल कचरा डाला गया है। इसकी जांच की गई तो इसमें गैस गोदाम स्थित के एक प्रतिष्ठित अस्पताल के पर्चे भी मिले। उधर नगर आयुक्त ने जब आस-पास के लोगों से बात की तो उन्होंने बताया कि ये कचरा पांच दिन पहले रात में डाला गया है। इस पर नगर आयुक्त ने ग्लोबल को फोन करके जैव चिकित्सीय कचरे को निस्तारित करने के निर्देश दिए। नगर आयुक्त ने बताया कि जिस अस्पताल के पर्चे मिले हैं। उसे नोटिस दिया जा रहा है। साथ ही कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि पहले गांधी स्कूल के सामने, गौला नदी में और आरक्षित वन क्षेत्र में जैव चिकित्सीय कचरा फेंके जाने के मामले सामने आए थे। इन मामलों को अमर उजाला ने उठाया तो निगम और प्रशासन सख्त हुआ। शहर में अस्पतालों से ग्लोबल कंपनी जैव चिकि त्सीय कचरा जमा करती है और कई अस्पताल इस कचरे को कंपनी को न देकर इधर-उधर फिकवा रहे हैं।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नोटिस तक सीमित
पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। जैव चिकित्सीय कचरा मिलने और जगह-जगह जैव चिकित्सीय कचरा फेंकने के सबूत मिलने के बाद भी अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है। हद तो यह है कि जैव चिकित्सीय कचरे में अस्पतालों के पर्चे, लेटर पेड और पकड़े गए लोगों के बयान के बाद भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी गहरी नींद में सोए हुए हैं। अभी तक बोर्ड की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। 15 दिन पहले जैव चिकित्सीय कचरा मिलने पर नगर आयुक्त की ओर से पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों को पत्र भेजा गया था। बोर्ड के अधिकारी कह रहे थे कि वह सभी अस्पतालों को नोटिस भेज रहे हैं और कार्रवाई भी करेंगे। लेकिन पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी अपने दफ्तर से बाहर ही नहीं निकले। नियमानुसार जैव चिकित्सीय कचरे का प्रबंधन और निस्तारण की जांच प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को करनी होती है। हालांकि बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डीके जोशी अब कह रहे हैं कि अस्पतालों को नोटिस भेजे गए हैं।

चिकित्सा विभाग को जांच करने तक की फुर्सत नहीं
चिकित्सा विभाग के अधिकारी जैव चिकित्सा कचरा मिलने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। सीएमओ ने जैव चिकित्सीय कचरा मिलने के बाद भी एक दिन अस्पतालों की जांच नहीं की है। नियमानुसार सीएमओ को अस्पतालों की जांच करनी होती है।

अस्पतालों के अधिकारियों को अभी तक प्रशासन समझा रहा था लेकिन अस्पताल डंडे के आदि हो गए हैं। मैं देहरादून में हूं। शनिवार को आ रहा हूं। जल्द ही अस्पतालों पर कार्रवाई की जाएगी। ग्लोबल की भी जांच होगी। वह कैसे जैव चिकित्सीय कचरे का निस्तारण कर रहा है। - दीपेंद्र चौधरी जिलाधिकारी नैनीताल
जैव चिकित्सीय कचरा मिलने पर अस्पतालोें के खिलाफ सीएमओ को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। यदि कोई बात सामने आती है तो उस पर गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए। - पंकज पांडे, अपर सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य
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