हल्द्वानी। सेहत का खजाना कहे जाने वाले फलों को नशेड़ियों ने चिलम का रूप दे दिया है। इस ईजाद के जरिए युवा अपने परिजनों को धोखा दे रहे हैं। दरअसल अभी तक सिगरेट, चिलम के सेवन की चुगली तंबाकू की खराब महक परिजनों से कर देती थी। लेकिन, फलों के चिलम के रूप में इस्तेमाल करने से यह बदबू सुगंधित खुशबू में परिवर्तित हो जाती है। इसके अलावा नशे के कारोबारियों ने नई पीढ़ी को बर्बादी की ओर ढकेलने के लिए कई और तरीके ईजाद किए हैं, जिसकी चपेट में आकर युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है। गौर करने वाली बात यह है कि बड़ी संख्या में लड़कियां भी नशे की गिरफ्त में आ रही हैं।
ब्रेड में आयोडेक्स, बाम को जैम की तरह खाना, पॉलीथीन/रूमाल में थिनर सूंघने से लेकर नशे के इंजेक्शन के बाद नशेड़ियों ने नया प्रयोग फलों पर किया है। हल्द्वानी निवासी अशोक (काल्पनिक नाम) ने बताया कि फलो में आर-पार छेद करके उसके एक छोर पर सिगरेट लगाकर और दूसरे छोर से कस लेने का प्रचलन आजकल जोरों पर हैं। इससे मुंह से बदबू भी नहीं आती और सुगंधित तंबाकू का मजा ही अलग है। हल्के कच्चे केले की चिलम बनाकर उसका इस्तेमाल गांजा पीने के लिए किया जा रहा है। तुषार( काल्पनिक) ने बताया कि आजकल बाजार में बॉग काफी प्रचलित है। यह पुराने हुक्के की तरह होती है। लेकिन, इसमें आप अलग-अलग फ्लेवर डाल सकते हैं। आठ इंच के बांग की कीमत साढ़े पांच सौ रुपये है। क्वालिटी के अनुसार इसकी कीमत बढ़ती जाती है। गौर करने वाली बात यह है कि ऑनलाइन बिक्री करने वाली कई नामी कंपनियां तक इसे बेच रही हैं।
ई-सिगरेट बना रही नशेड़ी
बाजार में ई-सिगरेट का कारोबार भी धड़ल्ले से चल रहा है। यह एक बैटरी चालित उपकरण होता है। इसे जलाने की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें इस्तेमाल किया जाने वाला निकोटिन तंबाकू से ही हासिल किया जाता है। यह ऐसी सिगरेट होती है, जो छोटी बैटरी से चलती है। जब इससे कश लेते हैं, तो इससे भाप निकलती है जिसमें निकोटिन मिला हुआ होता है। बाजार में ई-सिगरेट कई फ्लेवर में उपलब्ध है।
हल्द्वानी में नशे के अड्डे
सरस मार्केट के बाहर, डीसी कांप्लेक्स, बिठोरिया के प्राथमिक विद्यालय के पास, गौलापार स्थित कालीचौड़ मंदिर को जाने वाला रास्ता, भोटिया पड़ाव, फतेहपुर में भाकड़ा नदी के पास, मीठाआंवला, लामाचौड़, एमबीपीजी के सामने वाला पार्क, रेलवे स्टेशन
‘तूतन’ चाहिए क्या
यहां तूतन का जिक्र मिस्र के राजा तूतन खामेन के सिलसिले में नहीं हो रहा है, बल्कि यह कोड वर्ड है जो नशे के कारोबारी स्मैक इधर से उधर करने में इस्तेमाल कर रहे हैं। हर बार कोड अलग होता है। कई बार तो यह फलों के नाम और खाद्य पदार्थों के नाम पर भी होता है।
एक मोहल्ले में पक रही चरस की ‘खिचड़ी’
हल्द्वानी में एक मोहल्ला ऐसा भी है जहां चरस का कारोबार खुले आम हो रहा है। अगर आप कभी खिचड़ी मोहल्ले में चले गए तो वहां आपसे कोई न कोई यह अवश्य पूछेगा कि कितने का चाहिए। सब कुछ जानने के बावजूद पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। इसी इलाके में चरस का चूर्ण खूब बिक रहा है। इसे आम बोलचाल में डोडा के नाम से जाना जाता है, यह आसानी से उपलब्ध हो जाता है।
फ्लेवर्ड सिगरेट के दीवाने हजार
धूम्रपान के नए-नए शौकीनों में फ्लेवर्ड सिगरेट भी काफी पसंद की जा रही है। बाजार में स्ट्राबेरी, अनानास, चॉकलेट, लौंग, मेंथोल आदि फ्लेवरों की कई ब्रांडेड सिगरेट बिक रही हैं। इन सिगरेटों की कीमत 25 रुपये प्रति सिगरेट से लेकर 200 रुपये प्रति सिगरेट तक है।
बस स्टेशन के आसपास बिक रहा रिजला पेपर
धूम्रपान करने वाले युवा चरस का नशा करने के लिए रिजला पेपर का खूब प्रयोग कर रहे हैं। रोडवेज बस स्टेशन से लेकर शहर के अलग-अलग हिस्सों में पान और सिगरेट बेचने वालों के पास रिजला पेपर आसानी से मिल जाता है। एक रिजला पेपर की शीट 50 रुपये में मिल जाती है। एक शीट से 35 हिस्से बनाकर इसे तीन से पांच रुपये प्रति शीट के हिसाब से बेचा जा रहा है।