उत्तराखंड में विद्युत उत्पादन की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। विकास का राग अलाप रही सरकार विद्युत परियोजनाओं से मुंह मोड़े हुए हैं। राज्य के बिजली की जरूरत निजी कंपनियों से खरीद कर पूरी की जा रही है और करोड़ों रुपये चुकाए जा रहे हैं।
गर्मियों के चलते बिजली की मांग बढ़ती जा रही है। बिजली की मांग 40.09 मिलियन यूनिट तक पहुंच चुकी है। राज्य की उत्पादन इकाईयों से महज 12.88 मिलियन यूनिट का बिजली उत्पादन हो रहा है। केंद्रीय सेक्टर एवं अन्य स्रोतों को शामिल करने के बाद भी 39.33 मिलियन यूनिट बिजली मिल पा रही है। टाटा कंपनी से 75 मेगावाट बिजली खरीदी जा रही है। पावर कारपोरेशन सुचारु आपूर्ति के लिए इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से भी बिजली खरीद रहा है।
जुलाई-अगस्त के लिए 150-150 मेगावाट बिजली खरीदने का करार टाटा कंपनी से हुआ था। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सौ मेगावाट बिजली टाटा से 2.66 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदी जाएगी। 50 मेगावाट बिजली पावर ट्रेडिंग कंपनी से शाम को छह से नौ बजे के लिए 3.20 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदी जाएगी। सुबह सात से दस बजे के लिए टाटा से दो सौ मेगावाट बिजली 3.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से और शाम को छह से नौ बजे तक अडानी ग्रुप से पचास मेगावाट बिजली 3.25 प्रति यूनिट की दर से पावर कारपोरेशन खरीदेगा। पावर कारपोरेशन को सितंबर माह के लिए उक्त बिजली के एवज में 27.5 करोड़ रुपये चुकाने पड़ेंगे।