हल्द्वानी। कुमाऊं में बस हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। सोमवार को रामनगर के धनगढ़ी में हुए भीषण सड़क हादसे ने एक बार फिर सिस्टम की पोल खोल दी है। निजी बस के ब्रेक फेल होने के बाद हादसा होने के बाद वाहनों की फिटनेस को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
पर्वतीय क्षेत्रों में बीते एक साल में हुए हादसों में 24 से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। हर हादसे में कहीं न कहीं फिटनेस पर सवाल जरूर खड़ा हो रहा है। चार नवंबर 2004 को अल्मोड़ा सल्ट ब्लॉक के मरचूला में बस खाई में गिरने से 20 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 38 यात्री घायल हुए थे। बस में क्षमता से अधिक यात्री मिलने पर परिवहन विभाग की चेकिंग पर सवाल उठा था। इसके एक महीने बाद ही पिथौरागढ़ से हल्द्वानी लौट रही रोडवेज बस भीमताल के पास आमडाली में कार को बचाते वक्त पैराफिट तोड़कर 150 फुट गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में चार लोग काल के गाल में समा गए थे, चालक-परिचालक समेत 23 यात्री घायल हुए। इस साल 26 जनवरी को बागेश्वर से हल्द्वानी आ रही बस कार से टकरा गई थी और पहाड़ी से जा भिड़ी। हादसे में बस सवार 18 यात्रियों में चीख-पुकार मच गई थी। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया था। इधर अब रामनगर के धनगढ़ी में हुए हादसे ने सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
धनगढ़ी हादसा लापरवाही का नतीजा: आरटीओ
हल्द्वानी। रामनगर में सोमवार को हुआ हादसा लापरवाही का नतीजा है। जांच में बस के ब्रेक फेल होने जैसी कोई बात सामने नहीं आई है। आरटीओ प्रवर्तन डॉ. गुरुदेव सिंह ने बताया कि धनगढ़ी नाला उफान पर था तभी बस चालक उतरकर पानी का बहाव देखने चला गया। इसी बीच बस स्वामी ने स्टेयरिंग पकड़ लिया और अनियंत्रित होकर बस बाइक से टकरा गई। इस मामले में बस का परमिट व चालक का लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई की जा रही है।
सड़क हादसे रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। टीआई के साथ एआरटीओ बसों की फिटनेस आदि की जांच कर रहे हैं। इसके अलावा बस स्वामियों व चालकों को विशेषकर पर्वतीय मार्गाें पर सावधानी बरतने के लिए जागरूक किया जाता रहा है।
- डॉ. गुरुदेव सिह, आरटीओ प्रवर्तन, नैनीताल