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दिल्ली जाएगी ब्लड डोनेशन ट्रैम

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हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल के ब्लड बैंक को नाको की ओर से ब्लड डोनेशन कैंप के लिए दी गई ट्रैम शो पीस बनी हुई है। ट्रैम को भी दिल्ली वापस भेजने की तैयारी है। ट्रैम का भी अस्पताल के नाम पंजीकरण नहीं है। साथ ही ज्यादा बड़ी होने के कारण ट्रैम पहाड़ पर ले जाने में भी सक्षम नहीं है।
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नवंबर 2017 में सुशीला तिवारी अस्पताल को नाको की ओर से ट्रैम दी गई थी। ट्रैम का प्रयोग रक्तदान शिविर में प्रयोग करने के लिए था। सूत्रों की मानें तो ट्रैम आज तक निकली ही नहीं। उसे अस्पताल से मेडिकल कालेज परिसर तक ले जाने में समस्या होती है। मानक से अधिक बड़ी होने के कारण ट्रैम पहाड़ पर नहीं जा सकती है। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. सलोनी उपाध्याय ने बताया कि नाको के अधिकारियों से बात हुई है और ट्रैम जल्द ही दिल्ली भेजी जाएगी।
कमियों के चलने वापस गई मेमोग्राफी वैन
हल्द्वानी। चिकित्सा-शिक्षा के बड़े-बड़े दावे को मेमोग्राफी वैन मुंह चिढ़ाकर वापस देहरादून चली गई। वैन में 14 कमियां बताते हुए रिपोर्ट दी गई थी।
चिकित्सा-शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष स्याना ने दावा कि था कि पहाड़ पर मेमोग्राफी वैन से महिलाओं की जांच हो सकेगी। उनको अस्पताल नहीं आना पड़ेगा। हंस फाउंडेशन की ओर से मेमोग्राफी वैन राजकीय मेडिकल कालेज हल्द्वानी को दी गई थी। वैन मेडिकल कालेज आने के बाद से शो पीस बनकर खड़ी रही। सूत्रों की मानें तो वैन में रेडिएशन रोकने की क्षमता नहीं थी। साथ ही अन्य कई कमियां थीं। वैन साइज में बड़ी होने के कारण पहाड़ पर भी नहीं जा सकती थी। वैन की कमियों को लेकर एक रिपोर्ट प्राचार्य को दी गई थी मगर रिपोर्ट पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उपकरण भी सभी प्लास्टिक बाडी में लगे थे। साथ ही बस की बाडी बड़ी होने के कारण ड्राइवर को पीछे देखने में दिक्कत होती है। बिजली कनेक्शन का भी कोई प्रावधान नहीं था।
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ट्रैम और वैन राजकीय मेडिकल कालेज के नाम से पंजीकृत नहीं थी। पंजीकरण होने के बाद वैन वापस आ जाएगी। मगर मानक पूरे नहीं होंगे तो आरटीओ कार्यालय से पंजीकरण नहीं होगा। इंश्योरेंस और सीएमसी की भी कुछ पता नहीं है।
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-डॉ. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कालेज
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