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भाजपा कर रही आस्था का बाजारीकरण

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harish rawat - फोटो : amar ujala
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हल्द्वानी। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ के विकास के मॉडल को नाटक करार देते हुए कहा कि पीएम सिर्फ बासी शिलान्यास और उद्घाटन ही कर रहे हैं। पीएम के दौरे को देखते हुए ही उन्हें अपनी केदारनाथ यात्रा टालनी पड़ी है। रावत ने मुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री पर शराब कंपनियों के सेल्समैन के रूप में काम करने का आरोप जड़ा और लगे हाथों निकाय चुनाव को लेकर भी प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
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रामपुर रोड स्थित एक होटल में मीडिया से मुखातिब हरीश रावत ने कहा कि पीएम 29 अप्रैल को केदारनाथ आएंगे और इस वजह से वे पांच से नौ मई के बीच पीएम का विकास मॉडल देखने केदारनाथ जाएंगे। रावत ने भाजपा पर आस्था के बाजारीकरण का आरोप जड़ा और कहा कि भाजपा लेजर शो के जरिये केदार में विद्यमान भगवान शिव के कल्याणकारी स्वरूप को नटराज के रूप में प्रदर्शित करने पर तुली है। राजनीतिक फायदे के लिए धर्म स्थल को पर्यटक स्थल में बदला जा रहा है।

रावत ने कहा कि कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए शराब के ठेकों के लिए ई टेंडरिंग की जा रही है। नीलामी की प्रक्रिया सबसे पारदर्शी थी। गुजरात की तर्ज पर निकाय चुनाव टालने के लिए प्रक्रिया में खामियां छोड़ी जा रही हैं। मुख्यमंत्री या मंत्री को संवैधानिक संकट की जिम्मेदारी लेते हुए संबंधित मंत्री को बर्खास्त करना चाहिए। रावत ने आरोप लगाया कि बारिश से फसल को हुए नुकसान में बीमा कंपनियों को बचाने के लिए राज्य सरकार ने फर्जी सर्वे कराया है। ग्राम सभा स्तर पर सर्वे होना चाहिए। इस दौरान भोलादत्त भट्ट, विजय सिजवाली, खजान पांडे, प्रयाग भट्ट, हर्षवर्धन पांडे, आनंद रावत, राहुल सोनकर आदि थे।
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