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सरकार ने शिक्षकों को अपमानित करने में किया ताकत का इस्तेमाल

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हल्द्वानी। सत्ता के अहंकार में उच्च शिक्षा मंत्री ने उच्च शिक्षा निदेशक, दो प्राचार्य समेत एक शिक्षक को निलंबित किया है। सरकार ने शिक्षकों को अपमानित करने के लिए अपनी ताकत का इस्तेमाल किया है। मुख्यमंत्री को शिक्षकों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और तत्काल निलंबन वापस लेना चाहिए। साथ ही मंत्री से जवाब तलब करना चाहिए। इस मामले को प्रधानमंत्री और देश के शिक्षा मंत्री तक पहुंचाया जाएगा।
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शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि छात्र संघ चुनाव में एनएसयूआई की छात्रा मीमांशा आर्या के नामांकन को रद्द करने का आदेश उच्च शिक्षा राज्य मंत्री ने निदेशालय में प्रधानाचार्य को दिया था। वीडियो वायरल होने से आम लोगों तक मंत्री की बात पहुंच गई थी। प्राचार्य ने नियमों की जानकारी देते हुए नामांकन रद्द करने से इंकार कर दिया था। मंत्री ने डिग्री रद्द करने का दबाव निदेशालय से लेकर सचिवालय तक बनाया। कहा कि अगले वर्ष उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएस मेलकानी सेवानिवृत्त होने वाले थे। प्राचार्य डॉ. जगदीश प्रसाद को शिक्षा मंत्री ही लेकर आए थे। कहा कि मेरे राजनीतिक जीवन में उच्च पदस्थ महाविद्यालय के प्राचार्य को पहली बार निलंबित किया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में प्रकाशित तमाम आयोग का अध्ययन किया। वर्तमान सरकार ने शिक्षकों के साथ नौकरों जैसा बर्ताव किया है।
उन्होंने शिक्षक एवं छात्र संगठनों से आह्वान किया कि अपमान की अवमानना के विरुद्ध आवाज उठाएं। कहा कि उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह से लेकर राजनाथ सिंह की सरकार ने तक शिक्षकों को अपमानित करने का दुस्साहस नहीं किया। मुख्यमंत्री को शिक्षकों से माफी मांगने के साथ ही तत्काल प्रभाव से निलंबन वापस लेना चाहिए।
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