हल्द्वानी। घाटे से जूझ रहे हिमान्या मार्ट (सरस बाजार) को घाटे से उबारने के लिए सरस बाजार में ग्राहकों के लिए मूलभूत सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। सब कुछ ठीक रहा तो सरस बाजार तक पहुंचने के लिए लिफ्ट की सुविधा तो होगी ही साथ ही मुख्य रोड से हिमान्या मार्ट तक पहुंचने के लिए स्काई वाक का भी निर्माण कराया जाएगा। इस दिशा में जिला प्रशासन ने प्रयास शुरू कर दिए हैं।
लगभग एक दशक पहले जिला प्रशासन ने नैनीताल रोड से सटे कुमाऊं मंडल विकास निगम के सरस कांप्लेक्स में सरस बाजार की स्थापना की, जिसे बाद में हिमान्या मार्ट नाम दिया गया। यहां कुमाऊं मंडल के विभिन्न गांवों में कार्यरत स्वयं सहायता समूहों और महिला समूहों द्वारा उत्पादित पहाड़ी दालें, बड़ी, मंगोड़ी, मसाले, पिठियां, कुमकुम, मक्का, मडुवे का आटा, स्क्वैस, जैम, जैली, पापड़, कचरी, आचार, तेल, जंबू, गंद्राणी, कुमाऊं के बागानों में होने वाली चाय आदि की बिक्री होती है, लेकिन सरस बाजार तक कम ही ग्राहक पहुंचते हैं। जिसके चलते सरस बाजार लगातार घाटे में चल रहा है।
इस बाबत मुख्य विकास अधिकारी विनीत कुमार ने ग्राम्य विकास विभाग और ब्लॉक के अधिकारियों के साथ बैठक की। बताया गया कि सरस बाजार तीसरी मंजिल पर है। यहां पहुंचने से पहले ग्राहकों को पार्किंग से आड़े तिरछे खड़े वाहनों की बीच से गुजरना होता है और रास्ता भी खराब है। ऐसे में ग्राहक यहां तक नहीं पहुंच पाते हैं। बैठक के बाद सीडीओ ने बताया कि सरस बाजार तक पहुंचने के लिए लिफ्ट लगाने, मुख्य रोड से बाजार तक पहुंचने के लिए स्काई वॉक बनवाने और सरस बाजार को मॉल का रूप देने का फैसला लिया गया है। शीघ्र ही इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया जाएगा।
सरस बाजार पहुंचने को लगेगी लिफ्ट, बनेगा स्काई वॉक
हिमान्या मार्ट को घाटे से उबारने की पहल शुरू
सीडीओ ने अधिकारियों के साथ बैठक कर रणनीति बनाई
क्या है स्काई वॉक
स्काई वाक फुट ओवरब्रिज का रूप है जो एलीवेटेड रोड की तरह चौराहों या फिर एक साथ मिल रही कई सड़कों पर पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए बनाया जाता है। स्काई वॉक पैदल चलने के लिए होता है। इसमें कई जगह उतरने और चढ़ने की व्यवस्था होती है। जिससे लोग खरीदारी करने या घूमने आदि के उद्देश्य से जहां जाना चाहते हैं, वहां आसानी से पहुंच सकते हैं। उन्हें वाहनों के बीच से नहीं गुजरना पड़ता।
सालाना 23 लाख तक होती है बिक्री
वर्ष 2018-19 में अप्रैल से लेकर मार्च तक सरस बाजार में कुल 23 लाख 69 हजार 416 रुपये की बिक्री हुई। बिक्री से मिली रकम में से स्वयं सहायता समूहों के सामान की कीमत देने के बाद बिजली, पानी, मानदेय का खर्च निकालना मुश्किल हो जाता है। क्योंकि सरस बाजार में बिजली, पानी, मानदेय आदि में ही 2 लाख 52 हजार 50 रुपये खर्च होता है। ऐसे में सरस बाजार लगातार घाटे की स्थिति से जूझ रहा है।