हल्द्वानी। वायरस के कारण फैलने वाली बीमारियों और नए वायरस की जानकारी अब राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) हल्द्वानी में ही मिल सकेगी। दो माह के भीतर ही हल्द्वानी कॉलेज में वायरोलॉजी लैब शुरू हो जाएगी।
वायरोलॉजी लैब की स्वीकृति केंद्र सरकार ने वर्ष 2015 में दी थी साथ ही एक करोड़ तीस लाख रुपये भी स्वीकृत हुए थे। धनराशि इंफ्रास्ट्रक्चर और उपकरण के लिए दिए गए थे। वर्ष 2016 में वायरोलॉजी लैब का काम शुरू हो गया था। लैब बनकर तैयार हो गई है। लैब के लिए आवश्यक उपकरण भी खरीद लिए गए हैं। लैब में होने वाली जांचों के लिए किट भी मंगाई जा रही है। लैब के लिए एक रिसर्च वैज्ञानिक, एक रिसर्च सहायक और एक लैब टेक्नीशियन की नियुक्ति भी कर ली गई है। तीनों को ट्रेनिंग के लिए जल्द ही नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे भेजा जाएगा। वायरोलॉजी लैब के शुरू होने के साथ ही मीजल्स (खसरा), मम्स, रुबेला, डेंगू, इंसेफ्लाइटिस, हेपेटाइटिस ए और ई (पानी से फैलने वाली) की जांच हो सकेगी। जांच के लिए अब सैंपल पुणे या दिल्ली नहीं भेजनी पड़ेगी। लैब के बनने से कुमाऊं में बीमारी फैलाने वाले वायरस का पता चल सकेगा साथ ही बीमारी के वाहक बन रहे नए वायरस के बारे में भी जानकारी मिल सकेगी।
दो माह में राजकीय मेडिकल कॉलेज में शुरू हो जाएगी वायरोलॉजी लैब
मीजल्स, रुबेला, मम्स, डेंगू, इंसेफ्लाइटिस, हेपेटाइटिस ए और ई की जांच को बाहर नहीं भेजने पड़ेंगे सैंपल
केंद्र सरकार देगी वेतन
हल्द्वानी। रिसर्च वैज्ञानिक, रिसर्च सहायक और लैब टेक्नीशियन का वेतन पांच वर्षों तक केंद्र सरकार देगी। केंद्र सरकार की ओर से कुल साढ़े तीन करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पांच वर्षों बाद लैब राज्य सरकार को हस्तांतरित हो जाएगी।
लैब बनने के स्वास्थ्य विभाग के लैब टेक्नीशियनों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्क्रब टायफस पर जनरल प्रकाशित होने के बाद अब लक्षणों के आधार पर ही मरीजों को चिह्नित कर लिया जा रहा है और उचित इलाज मिलने के कारण मरीज ठीक हो रहे हैं। वायरोलॉजी लैब में नए वायरस की जानकारी मिलने के बाद इलाज पर भी शोध हो सकेगा। चिकित्सकों को इलाज करने में सहायता मिलेगी। केंद्र सरकार की ओर से 39 लाख रुपये और जारी किए गए हैं।
- डॉ. विनीता रावत
एसोसिएट प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी विभाग