हल्द्वानी। कुमाऊं विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्थाओं में खामियों पर रोक नहीं लग पा रही है। बीएससी तृतीय सेमेस्टर में आर्गेनिक केमिस्ट्री का द्वितीय प्रश्नपत्र सिर्फ अंग्रेजी में आने से हिंदी माध्यम के सैकड़ों परीक्षार्थियों की परीक्षा छूट गई। हंगामा होने पर विश्वविद्यालय ने आनन फानन में अंतिम समय में हिंदी माध्यम में पेपर भेजा भी मगर उसका कोई लाभ नहीं हो सका। इधर, यह मामला उच्चशिक्षा मंत्री तक भी पहुंचा और कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीके नोड़ियाल को केमिस्ट्री के पेपर की खामी के लिए कमेटी गठित करनी पड़ी। कुलपति ने कहा है कि अगर हिंदी माध्यम के सैकड़ों विद्यार्थियों की परीक्षा छूटने की रिपोर्ट मिलती है तो इस प्रश्नपत्र की परीक्षा दोबारा कराने पर फैसला किया जाएगा।
कुमाऊं विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षाएं चल रही हैं। बुधवार को एमबीपीजी कॉलेज में अपराह्न एक बजे से शाम चार बजे की दूसरी पाली में बीएससी तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों की आर्गेनिक केमिस्ट्री की परीक्षा थी। इसमें 1157 परीक्षार्थी बैठे थे। प्रश्नपत्र मिलते ही शोर शराबा शुरू हो गया। प्रश्नपत्र केवल अंग्रेजी में था। यह देख परीक्षार्थी गुस्सा गए और उन्होंने प्रश्नपत्र में हिंदी में प्रश्नपत्र न होने को लेकर हंगामा शुरू कर दिया।
इधर, परीक्षा कक्षों में हंगामा होने पर महाविद्यालय की परीक्षा नियंत्रक डा. पूर्णिमा भटनागर ने तुरंत विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग को सूचित किया। बताते हैं कि अपराह्न 3.40 बजे कुमाऊं विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में छपे केमिस्ट्री के प्रश्नपत्र का हिंदी रूपांतरण एमबीपीजी कालेज के परीक्षा विभाग को प्राप्त हुआ। परीक्षार्थियों की संख्या 1157 होने के कारण उन्हें बांटने के लिए हिंदी माध्यम के प्रश्नपत्र की अगर फोटो कापी भी की जाती तो वह 20 मिनट में नहीं हो सकती थी लिहाजा कुछ नहीं हो सका और पेपर छूट गया।
बाद में यह मामला उच्चशिक्षामंत्री डॉ. धनसिंह रावत तक पहुंचा तो कुमाऊं विश्वविद्यालय में प्रश्नपत्रों में बार-बार आ रही खामियों के उजागर होने को लेकर खलबली में मच गई।
कुलपति डॉ. नोड़ियाल ने अमर उजाला को बताया कि प्रश्नपत्र में गड़बड़ी की जांच के लिए कमेटी गठित की जा रही है। महाविद्यालयों से बीएससी के हिंदी माध्यम के छात्रों की परीक्षा छूटने की रिपोर्ट मिलने पर आर्गेनिक केमिस्ट्री का पेपर दोबारा कराने पर निर्णय किया जाएगा। कुलपति ने कहा कि प्रश्नपत्रों में इस तरह की खामियों पर अंकुश लगाने के लिए भी कठोर कदम उठाए जाएंगे। वहीं, कुलसचिव प्रो. सुधीर बुधलाकोटी ने भी इस मामले में जांच कराने की बात कही है।
-उच्चशिक्षामंत्री डा. धनसिंह रावत ने कहा कि यह मामला गंभीर है। सरकार विद्यार्थियों को उनके भाषिक चयन के आधार पर पढ़ने की सुविधा मुहैया कराने की बात कह रही है और कुमाऊं विवि में प्रश्नपत्र सिर्फ अंग्रेजी में आना गलत है। हिंदी माध्यम के परीक्षार्थियों की परीक्षा छूटने पर कुमाऊं विवि को इस पेपर की परीक्षा दोबारा कराने को कहा है।