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..तो आखिर कहां जाएगा 119 टन कूड़ा

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हल्द्वानी गंदगी से पटा पड़ा ट्रंचिंग ग्राउंड। - फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। ठोस कचरा और बायो मेडिकल पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम हल्द्वानी खासी मुसीबत में फंस गया है। नगर निगम के सामने शहर के साथ ही नैनीताल और भवाली का कूड़ा डंप करने की समस्या उठ खड़ी हुई है। अभी चार हेक्टेयर जमीन निगम को हस्तांरित नहीं हुई है। इससे शहर के साथ-साथ नैनीताल, भवाली और हल्द्वानी ग्रामीण क्षेत्र का कूड़ा निस्तारण बंद होने की समस्या उठ खड़ी हुई है।
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इंदिरा नगर जन विकास समिति ट्रंचिंग ग्राउंड को हटाने और कूड़े का निस्तारण करने के लिए लंबे समय से आंदोलन कर रही है। जब आंदोलन से उसे सफलता नहीं मिली तो उसने कोर्ट का रूख किया। कोर्ट ने अपने आदेश में ट्रंचिंग ग्राउंड में कूड़े डालने में रोक लगा दी है।

ये आदेश अब नगर निगम और जिला प्रशासन के गले की हड्डी बन गया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि 119 टन कूड़ा अब कहां डाला जाएगा। इसके पीछे नगर निगम की लापरवाही भी साफ दिखाई दे रही है। नगर निगम की लेटलतीफी और सही से पैरवी नहीं कर पाने के कारण अभी भी जमीन का मामला फंसा हुआ है।
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उधर नगर निगम के अधिकारी जिलाधिकारी के आदेशों की भी अवेहना करते रहे। जिलाधिकारी ने नगर निगम को कूड़े में मिट्टी डालने के निर्देश दिए थे। लेकिन अभी तक कूड़े के उपर मिट्टी नही डाली गई।

स्थानीय प्रशासन ने भी नहीं दिखाई रुचि
स्थानीय प्रशासन ने भी ट्रंचिंग ग्राउंड के मामले में रूचि नहीं दिखाई। इंदिरा नगर जन विकास समिति के आंदोलन के बाद हुए समझौते का पालन भी स्थानीय प्रशासन नहीं करा पाया।

जैव चिकित्सीय कचरा भी रहा कारण
हाइकोर्ट ने साफ कहा था कि ट्रंचिंग ग्राउंड में जैव चिकित्सीय कचरा न डाला जाए। लेकिन नगर निगम प्रशासन और स्थानीय प्रशासन इसका पालन कराने में असमर्थ रहे। अमर उजाला के खबर प्रकाशित करने के बाद इसमें कमी आई। लेकिन पूर्णतया इसका पालन नहीं हो पाया।

चार हेक्टेयर जंगल हुआ बरबाद
ट्रंचिंग ग्राउंड वन विभाग के मौखिक आदेशों में दिया गया। उस समय मात्र दो हेक्टेयर जमीन दी गई थी। लेकिन वन विभाग की लापरवाही के कारण चार हेक्टेयर जंगल बरबाद हो गया। नगर निगम ने दो हेक्टेयर के बदले चार हेक्टेयर जमीन में कूड़ा डाल दिया। साथ ही कूड़े में लगी आग से कई पेड़ जल गए।
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सीवर और निगम का गंदा पानी भी नदी में डाला
सीवर और निगम का गंदा पानी भी गौला नदी में जा रहा है। इसके लिए कभी नगर निगम की ओर से इसे रोकने के प्रयास नहीं किए गए। इससे नदी का जल प्रदूषित हुआ।

ये है चार हेक्टेयर जमीन की स्थिति
-21 अगस्त 2015 को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने जमीन हस्तांतरण की सैद्धांतिक सहमती दी थी।
-20 फरवरी 2018 को केंद्रीय मंत्रालय ने गौजाजाली के पास चार हेक्टेयर जमीन निगम को देने की आदेश दिया
-27 मार्च 2018 को डीएफओ तराई को यह अंतिम सहमति मिली
-नगर निगम को इसके बदले एक हेक्टेयर जमीन में एक हजार पौधे लगाने हैं।
-नगर निगम ने पौधारोपण के लिए पैसे जमा करा दिये हैं। जमीन निगम को हस्तांतरित होने की प्रक्रिया जारी है।


ये कूड़ा आता है ट्रंचिंग ग्राउंड -
नगर निगम क्षेत्र का कूड़ा - 80 टन
ग्रामीण क्षेत्र का कूड़ा - 20 टन
नैनीताल का कूड़ा - 12 टन
भवाली का कूड़ा - सात टन

प्रशासन के आगे अब ये है चुनौती
- कूड़े का उठान करके कहां कूड़ा डंप किया जाए।
- मानसून सीजन में कूड़ा उठान नहीं होने से नालियां चोक हो जाएंगी।
- जल भराव का कैसे निस्तारण किया जाए।
- कूड़े को सड़ने से कैसे बचाया जाए।

हाईकोर्ट का ट्रंचिंग ग्राउंड को लेकर एक आदेश जारी हुआ है। इसका परीक्षण कराया जा रहा है। कूड़े डंपिंग को लेकर दूसरी जगह चयनित की जाएगी।
विनोद कुमार सुमन प्रशासक (डीएम) नगर निगम हल्द्वानी
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